नैनीताल- यहाँ सुबह सुबह चला धामी सरकार का बुलडोजर, 86 मकान ध्वस्त, 14 हेक्टेयर वन भूमि कराई कब्जामुक्त

नैनीताल/रामनगर- उत्तराखंड में सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत रामनगर की पुच्छड़ी बस्ती में वन विभाग और जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कोसी नदी के किनारे वन विभाग की करीब 14 हेक्टेयर सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए शनिवार तड़के बुलडोजर और जेसीबी के साथ अभियान शुरू किया गया। इस दौरान भारी पुलिस बल की मौजूदगी में 86 पक्के मकानों को ध्वस्त कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, पुच्छड़ी बस्ती में वन विभाग की बेशकीमती भूमि पर लंबे समय से अतिक्रमण कर मकान बनाए गए थे। कार्रवाई के लिए सुबह से ही वन विभाग और जिला प्रशासन की टीमें भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गई थीं। अभियान से पहले प्रशासन ने सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली थीं और मुनादी के माध्यम से लोगों को कार्रवाई की सूचना भी दी गई थी।
कार्रवाई से पहले ही कुछ लोगों ने खुद तोड़े मकान
प्रशासन ने कार्रवाई से एक दिन पहले पुलिस और वन विभाग की टीमों के साथ विस्तृत ब्रीफिंग की थी। सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की तैयारियों को देखते हुए कुछ अतिक्रमणकारियों ने अपने मकान खुद ही तोड़ने शुरू कर दिए थे। इसके बाद शनिवार को वन विभाग ने बुलडोजर की मदद से 86 पक्के मकानों को ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का कहना है कि कब्जामुक्त कराई गई भूमि वन विभाग को सौंप दी जाएगी।
ताहिर मुल्ला पर अवैध कब्जे बसाने का आरोप
मामले में ताहिर मुल्ला नाम के व्यक्ति पर वन भूमि को अवैध रूप से बेचकर पुच्छड़ी बस्ती बसाने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि उसने उत्तर प्रदेश के लोगों को वन विभाग की जमीन बेची थी। इस मामले में वन विभाग की ओर से संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विभागीय और पुलिस स्तर पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
भारी पुलिस बल के बीच चला अभियान
एसएसपी के मुताबिक, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुच्छड़ी बस्ती में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। भू-माफिया बताए जा रहे ताहिर मुल्ला की तलाश भी की जा रही है।
डीएम ने बनाई थी सुरक्षा की व्यापक व्यवस्था
नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने बताया कि अभियान को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए पूरे क्षेत्र को 2 सुपर जोन, 7 जोन, 14 सेक्टर और 6 बैरियर में बांटा गया था। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 5 सेक्टर मजिस्ट्रेट, 5 एएसपी, 6 सीओ, 25 इंस्पेक्टर, 82 उपनिरीक्षक और पीएसी की 3 कंपनियां तैनात की गई थीं।
प्रशासन का उद्देश्य वन विभाग की करीब 14 हेक्टेयर सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराकर दोबारा वन विभाग के कब्जे में देना है। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में प्रशासन और पुलिस की टीमें मुस्तैद रहीं।










