उत्तराखण्डकुमाऊं,

नैनीताल- सरकारी कामकाज में लापरवाही पड़ी भारी, डीएम के निर्देश पर इस अधिकारी पर हुई सख्त कार्यवाही

नैनीताल न्यूज़– जनहित और प्रशासनिक पारदर्शिता को सर्वोपरि रखते हुए जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल ने विकासखंड ओखलकांडा से जुड़े एक मामले में सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की है। विभागीय कार्यों में लापरवाही और उदासीनता के आरोपों के बाद खंड विकास अधिकारी (BDO) देशराज को पद से हटा दिया गया है।

 

जानकारी के अनुसार, विकासखंड ओखलकांडा में तैनात खंड विकास अधिकारी देशराज के खिलाफ विभागीय कार्यों में लापरवाही और जिम्मेदारियों के निर्वहन में उदासीनता की शिकायतें सामने आई थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अरविंद कुमार पांडे को जांच के निर्देश दिए।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट, 58 सड़कें अब भी बंद — राज्य आपातकालीन केंद्र ने जिलाधिकारियों को जारी किए निर्देश

 

मुख्य विकास अधिकारी द्वारा कराई गई विस्तृत जांच में खंड विकास अधिकारी पर लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। जांच रिपोर्ट में शासकीय कार्यों के निर्वहन में लापरवाही और कर्तव्यों के प्रति उदासीनता स्पष्ट रूप से सामने आने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई।

यह भी पढ़ें 👉  लालकुआँ- लंबे समय से अघोषित विद्युत कटौती और लो वोल्टेज की समस्या से परेशान पूर्व सैनिक संगठन ने हल्द्वानी जाकर अधिशासी अभियंता को दिया ज्ञापन

 

कार्रवाई के तहत खंड विकास अधिकारी ओखलकांडा के पद पर कार्यरत देशराज को तत्काल प्रभाव से पद से हटाते हुए सहायक खंड विकास अधिकारी (ABDO) के पद पर स्थानांतरित कर विकासखंड रामनगर में संबद्ध किया गया है।

 

वहीं प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए मुख्य विकास अधिकारी ने कुंवर सिंह सामंत, सहायक खंड विकास अधिकारी रामनगर को तत्काल प्रभाव से विकासखंड ओखलकांडा में संबद्ध करते हुए प्रभारी खंड विकास अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड- यहाँ खून से लथपथ मिला बुजुर्ग का शव, धारदार हथियार से हत्या की आशंका

 

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट कहा है कि जनपद में किसी भी स्तर पर शासकीय कार्यों में लापरवाही, अनुशासनहीनता या उदासीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन सुनिश्चित करना होगा।

 

जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को सुशासन और जवाबदेही की दिशा में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।