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उत्तराखंड में 781 रुपये दिहाड़ी की खबर निकली अफवाह, श्रम विभाग ने जारी की नई न्यूनतम वेतन दरें

श्रम आयुक्त बोले- राज्य में लागू न्यूनतम वेतन पड़ोसी राज्यों से अधिक, अफवाहों से बचें श्रमिक

देहरादून न्यूज- उत्तराखंड में न्यूनतम वेतन को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और श्रमिक संगठनों के बीच फैले भ्रम पर अब श्रम विभाग ने आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कर दी है। श्रम आयुक्त पी.सी. डुम्का ने कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उत्तराखंड में लागू न्यूनतम वेतन कई पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर है।

 

श्रम विभाग ने साफ किया है कि केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री की ओर से सभी श्रमिकों के लिए 781 रुपये प्रतिदिन का कोई नया न्यूनतम वेतन लागू नहीं किया गया है। विभाग के अनुसार यह दर केवल केंद्र सरकार के अधीन आने वाले कुछ केंद्रीय उपक्रमों और संस्थानों के लिए निर्धारित की गई है। उत्तराखंड के निजी उद्योगों और राज्य सरकार के अधीन संस्थानों पर यह सीधे लागू नहीं होगी।

 

 

विभाग ने बताया कि अप्रैल 2026 से इंजीनियरिंग और गैर-इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए नई न्यूनतम वेतन दरें और महंगाई भत्ता पहले ही घोषित किए जा चुके हैं। साथ ही सभी उद्योगों को इनका पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।

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उत्तराखंड में कितना है न्यूनतम वेतन
श्रम विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल श्रमिकों के लिए अलग-अलग वेतन निर्धारित किया गया है। अप्रैल 2026 से लागू नई दरों में महंगाई भत्ता भी शामिल है।

  • अकुशल श्रमिक – 13,800 रुपये प्रतिमाह
  • अर्द्धकुशल श्रमिक – 15,100 रुपये प्रतिमाह
  • कुशल श्रमिक – 16,900 रुपये प्रतिमाह

विभाग का दावा है कि यह वेतनमान कई पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक है।

 

पड़ोसी राज्यों से तुलना
श्रम विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में अकुशल श्रमिकों का वेतन भत्ते सहित करीब 11,250 रुपये प्रतिमाह है, जबकि बिहार में यह लगभग 11,336 रुपये बताया गया है। इसके मुकाबले उत्तराखंड में अकुशल श्रमिकों के लिए 13,800 रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन तय किया गया है।

 

विभाग का कहना है कि अर्द्धकुशल और कुशल श्रमिकों के वेतनमान में भी उत्तराखंड की स्थिति बेहतर है।

 

781 रुपये प्रतिदिन को लेकर क्या बोला विभाग
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर यह दावा वायरल हो रहा था कि केंद्र सरकार ने सभी श्रमिकों के लिए 781 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम वेतन लागू कर दिया है। इसी को लेकर कई औद्योगिक क्षेत्रों में भ्रम की स्थिति बन गई थी।

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अब श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि 781 रुपये प्रतिदिन की दर केवल केंद्रीय उपक्रमों और केंद्र सरकार के अधीन आने वाले कुछ संस्थानों पर लागू होती है। राज्य सरकार के अधीन उद्योगों और निजी संस्थानों में उत्तराखंड सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन ही मान्य होगा।

 

उद्योगों को दिए गए सख्त निर्देश
श्रम विभाग ने सभी उद्योगों और संस्थानों को न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम और बोनस संबंधी नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने कहा कि किसी भी श्रमिक को तय वेतन से कम भुगतान नहीं किया जाना चाहिए।

 

विभाग के मुताबिक पिछले 15 दिनों से श्रमिकों को जागरूक करने और सही जानकारी देने का अभियान चलाया जा रहा है। इसके बावजूद कुछ जगहों पर अफवाहें फैल रही हैं। ऐसे में श्रमिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें।
श्रम आयुक्त ने कहा कि औद्योगिक शांति बनाए रखना जरूरी है। उद्योग और श्रमिक दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और सहयोग से ही श्रमिकों का कल्याण संभव है।

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शिकायत के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम
श्रम आयुक्त कार्यालय हल्द्वानी में 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। वेतन या श्रम कानूनों से जुड़ी शिकायतों के लिए श्रमिक हेल्पलाइन नंबर 05946-282805 पर संपर्क कर सकते हैं।

 

इसके अलावा नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, ऊधमसिंह नगर, चंपावत, पिथौरागढ़, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, देहरादून और उत्तरकाशी जिलों के लिए सहायक श्रम आयुक्तों के मोबाइल नंबर भी जारी किए गए हैं।

 

श्रमिकों से विभाग की अपील
श्रम विभाग ने श्रमिकों से अफवाहों से बचने और किसी भी विवाद की स्थिति में कानून व्यवस्था या औद्योगिक माहौल खराब न करने की अपील की है। विभाग ने कहा कि सरकार श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए लगातार काम कर रही है।

 

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी श्रमिक को न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा है या श्रम कानूनों का उल्लंघन हो रहा है तो वह सीधे श्रम विभाग में शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।