व्यावसायिक सिलिंडर की किल्लत: मेडिकल कॉलेज नर्सिंग हॉस्टल की मेस में ब्लोअर से बना लकड़ी का चूल्हा, इसी पर बन रहा खाना

हल्द्वानी न्यूज़- व्यावसायिक गैस सिलिंडर की कमी का असर अब शैक्षणिक संस्थानों पर भी दिखाई देने लगा है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग छात्रावास की मेस में सिलिंडर नहीं मिलने से संचालकों को खाना बनाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में मेस संचालकों ने ब्लोअर की मदद से लकड़ी का चूल्हा बनाकर समस्या का अस्थायी समाधान निकाला है।
मेस का कामकाज संभालने वाले किशन मठपाल ने बताया कि कई दिनों से व्यावसायिक गैस सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं, जिससे मेस संचालन प्रभावित हो रहा है। लकड़ी के पारंपरिक चूल्हे पर खाना बनाने में अधिक समय लगता है और आग को जलाए रखने के लिए बार-बार फूंक मारनी पड़ती है। इसी समस्या को देखते हुए उन्होंने पुराने चूल्हे में 130 वोल्ट का ब्लोअर लगाकर उसे बिजली के बोर्ड से जोड़ दिया।
ब्लोअर से निकलने वाली हवा लगातार चूल्हे में पहुंचती रहती है, जिससे लकड़ी तेजी से सुलगती है और तेज आंच पैदा होती है। इसकी वजह से खाना भी कम समय में तैयार हो जाता है। उन्होंने बताया कि इस चूल्हे में लंबी लकड़ियों की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि छोटे-छोटे लकड़ी के टुकड़ों से ही काम चल जाता है।
उधर, मेडिकल कॉलेज परिसर में संचालित एमबीबीएस और पीजी छात्रों की मेस में भी शनिवार तक व्यावसायिक गैस सिलिंडर नहीं पहुंच पाए। जबकि दावा किया जा रहा है कि शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों को सिलिंडर प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मेस संचालक कन्हैया सिंह राजपूत ने बताया कि मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे और डीजल बर्नर की मदद से खाना बनाया जा रहा है। हालांकि इन व्यवस्थाओं के कारण भोजन बनाने में अधिक समय लग रहा है और छात्रों के लिए रोटियां बनाना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में मेस संचालक जल्द से जल्द व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति शुरू कराने की मांग कर रहे हैं।








