उत्तराखंड में SIR की फाइनल वोटर लिस्ट जारी, 8.01 लाख मतदाता घटे; 1.29 लाख नए नाम जुड़े

देहरादून न्यूज़- उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद शनिवार, 3 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। फाइनल वोटर लिस्ट के अनुसार प्रदेश में अब कुल 71 लाख 58 हजार 949 मतदाता हैं। पुनरीक्षण से पहले मतदाता सूची में दर्ज 79 लाख 60 हजार 762 नामों की तुलना में अब 8 लाख 1 हजार 813 मतदाता कम हो गए हैं। वहीं, पुनरीक्षण के दौरान 1 लाख 29 हजार 872 नए मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किए गए हैं, जबकि 1 लाख 4 हजार 708 नाम नियमानुसार हटाए गए हैं।
अंतिम मतदाता सूची में 37 लाख 37 हजार 701 पुरुष, 34 लाख 21 हजार 36 महिलाएं और 212 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। इससे पहले 14 जुलाई को प्रकाशित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 71 लाख 33 हजार 785 मतदाताओं के नाम थे। ड्राफ्ट सूची और अंतिम सूची के बीच दावे-आपत्तियों के निस्तारण तथा नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की गई।
ड्राफ्ट लिस्ट में 8.26 लाख नाम हुए थे कम
SIR शुरू होने से पहले प्रदेश में कुल 79 लाख 60 हजार 762 मतदाता दर्ज थे। इसके बाद बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म भरवाए और मतदाताओं के पुराने रिकॉर्ड का सत्यापन किया। इस प्रक्रिया के बाद 14 जुलाई को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 71 लाख 33 हजार 785 नाम शामिल किए गए।
ड्राफ्ट सूची में पहले की तुलना में 8 लाख 26 हजार 977 मतदाता कम दर्ज हुए थे। निर्वाचन आयोग के अनुसार, 8 जून से 13 जुलाई के बीच ऐसे मतदाताओं की पहचान की गई, जो दूसरे स्थानों पर चले गए थे, जिनके नाम एक से अधिक जगह दर्ज थे या जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। इसके बाद भी मतदाता सूची को अंतिम रूप देने से पहले नोटिस, सुनवाई और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी की गई।
19 लाख रिकॉर्ड में मिलीं विसंगतियां, 24.30 लाख नोटिस जारी
ड्राफ्ट मतदाता सूची तैयार करते समय करीब 19 लाख रिकॉर्ड में लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी यानी तार्किक विसंगतियां सामने आई थीं। इनमें नाम की वर्तनी में अंतर, उम्र से जुड़ी असामान्य जानकारी और माता-पिता, बच्चों या भाई-बहनों की उम्र के रिकॉर्ड में अंतर जैसे मामले शामिल थे।
ऐसी विसंगति मिलने का अर्थ अपने आप में मतदाता को अपात्र घोषित करना नहीं था। संबंधित मतदाताओं को नोटिस जारी कर अपनी जानकारी स्पष्ट करने और पात्रता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया।
SIR के दौरान करीब 24.30 लाख नोटिस जारी किए गए। इनमें रिकॉर्ड में विसंगति वाले और प्री-SIR सूची से मैपिंग नहीं हो पाने वाले मामले शामिल थे। 7 सितंबर तक 24 लाख 30 हजार 387 नोटिसों में से 24 लाख 29 हजार 524 मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी थी। इसके बाद भी दावे-आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया जारी रही।
95 हजार से अधिक मतदाता ‘इन-एलिजिबल’ चिह्नित
पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए करीब 1.73 लाख Form-7 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें 95 हजार से अधिक मामलों में मतदाताओं को ‘इन-एलिजिबल’ चिह्नित किया गया।
निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, संबंधित मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत नोटिस, दस्तावेज और सुनवाई से जुड़ी कार्रवाई की गई। जिन मामलों में जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए या सुनवाई में मतदाता अथवा परिवार का कोई सदस्य उपस्थित नहीं हुआ, उनमें ERO-AERO की कार्रवाई के बाद ECI-Net पर ‘इन-एलिजिबल’ चिह्नित किया गया।
हालांकि, 95 हजार से अधिक का यह आंकड़ा अंतिम रूप से हटाए गए नामों की संख्या नहीं था। फाइनल वोटर लिस्ट के मुताबिक कुल 1 लाख 4 हजार 708 मतदाताओं के नाम नियमानुसार हटाए गए हैं।
दावे-आपत्तियों में मिले 3.19 लाख आवेदन
ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद 14 जुलाई से 13 अगस्त तक दावे और आपत्तियां दर्ज की गईं। इस दौरान Form-6, Form-7 और Form-8 के कुल 3 लाख 19 हजार 309 आवेदन प्राप्त हुए।
इनमें नाम जुड़वाने के लिए 1 लाख 37 हजार 146 Form-6, नाम हटाने के लिए 1 लाख 30 हजार 382 Form-7 और मतदाता सूची में दर्ज विवरण में सुधार के लिए 51 हजार 781 Form-8 आवेदन शामिल थे।
दावे-आपत्तियों के निस्तारण के कारण अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख में बदलाव किया गया। पहले फाइनल लिस्ट 15 सितंबर को जारी होनी थी। बाद में इसकी तारीख 28 सितंबर निर्धारित की गई और अंततः 3 अक्टूबर को अंतिम सूची प्रकाशित की गई।
95 हजार मतदाताओं को अपात्र चिह्नित करने पर उठे सवाल
SIR के दौरान 95 हजार से अधिक मतदाताओं को ‘इन-एलिजिबल’ चिह्नित किए जाने के बाद विपक्षी दलों ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने Form-7 के इस्तेमाल और मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां जताईं।
वहीं, मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय का कहना है कि नाम हटाने की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई। कार्यालय के अनुसार, संबंधित मामलों में नोटिस, जवाब, दस्तावेज और सुनवाई से जुड़ी प्रक्रिया के बाद ही आगे की कार्रवाई की गई।
फाइनल लिस्ट में नाम नहीं तो क्या करें?
अंतिम मतदाता सूची में यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम नहीं है तो वह Form-6 भरकर नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। इसके साथ निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित दस्तावेज भी देने होंगे।
निर्वाचन विभाग ने पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत BLO घर-घर जाकर ऐसे लोगों की पहचान करेंगे, जिनके नाम पहले की मतदाता सूची में थे, लेकिन वर्तमान सूची में शामिल नहीं हैं।
पहली बार मतदान करने वाले युवाओं, छूटे हुए मतदाताओं, बेघर लोगों और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के पात्र व्यक्तियों के नाम जोड़ने के लिए विशेष कैंप भी लगाए जाएंगे। नाइट शेल्टर और लेबर कॉलोनियों में भी कैंप आयोजित कर आवेदन भरवाने में मदद की जाएगी।
BLO तैयार सूची को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) के साथ साझा करेंगे। इसके बाद निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) भी बूथवार सूची राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराएंगे, ताकि पात्र मतदाताओं के छूटे हुए नामों को शामिल कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
कहां देख सकते हैं फाइनल वोटर लिस्ट?
उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट पर देखी जा सकती है। इसके अलावा जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के कार्यालय और संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (BLO) से भी मतदाता सूची की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।








