उत्तराखंड में सड़क हादसों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, देहरादून में हाईलेवल बैठक, कैशलेस इलाज के सुस्त आकड़ो पर घिर सकते हैं अफसर

देहरादून न्यूज़- उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और सड़क सुरक्षा के इंतजामों को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट स्तर पर निगरानी तेज हो गई है। सड़क सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस अभय मनोहर सप्रे सोमवार को देहरादून में हाईलेवल समीक्षा बैठक कर रहे हैं। बैठक में सड़क सुरक्षा से जुड़े 12 प्रमुख एजेंडों पर विस्तार से समीक्षा की जा रही है।
बैठक में परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग (PWD), वित्त, शिक्षा, वन और NHAI समेत कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। अधिकारियों से सड़क हादसों की रोकथाम के लिए किए गए उपायों, उनकी जमीनी स्थिति और आगे की कार्ययोजना की जानकारी ली जा रही है।
8 महीने में 1,626 लोग हुए घायल
जनवरी से अगस्त 2026 तक उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं में 1,626 लोग घायल हुए हैं। इसके बावजूद सड़क हादसों में घायलों के लिए लागू कैशलेस इलाज की व्यवस्था के तहत महज 36 मामले ही सामने आए। इनमें भी सिर्फ 19 घायलों को कैशलेस इलाज का लाभ मिल सका।
कैशलेस इलाज के इतने कम आंकड़े समीक्षा बैठक में अहम मुद्दा बन सकते हैं। अधिकारियों से यह भी जानकारी ली जा सकती है कि योजना के बावजूद अधिकांश घायल इस सुविधा का लाभ क्यों नहीं उठा पा रहे हैं।
हादसे के बाद एक सप्ताह तक कैशलेस इलाज का प्रावधान
नियमों के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को एंपैनल्ड अस्पतालों में एक सप्ताह तक कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य हादसे के तुरंत बाद घायल और उसके परिवार को इलाज के खर्च की आर्थिक चिंता से राहत देना है।
अस्पतालों को इलाज के खर्च की त्वरित प्रतिपूर्ति किए जाने का भी प्रावधान है। इसके बावजूद योजना के तहत सामने आने वाले मामलों की संख्या बेहद कम है। ऐसे में बैठक में अस्पतालों की भागीदारी, योजना के क्रियान्वयन और घायलों तक सुविधा पहुंचने में आ रही दिक्कतों की समीक्षा की जा रही है।
12 प्रमुख एजेंडों पर होगी समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की समीक्षा में सड़क हादसों की रोकथाम से लेकर दुर्घटना के बाद घायलों को राहत और इलाज उपलब्ध कराने तक कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। अधिकारियों से अब तक किए गए कार्यों और भविष्य की कार्ययोजना का ब्योरा लिया जा रहा है।
सड़क सुरक्षा को केवल परिवहन या पुलिस विभाग तक सीमित नहीं रखा गया है। बैठक में परिवहन, पुलिस, वित्त, PWD, स्वास्थ्य, शिक्षा, वन और NHAI समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों से समन्वित कार्रवाई पर चर्चा की जा रही है।
हादसे रोकने और घायलों को समय पर इलाज दिलाने पर जोर
बैठक का मुख्य फोकस सड़क हादसों में कमी लाने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और दुर्घटना के बाद घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। कैशलेस इलाज के बेहद कम आंकड़ों को देखते हुए योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने और इसकी पहुंच बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की यह समीक्षा ऐसे समय हो रही है, जब प्रदेश में सड़क हादसे लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में बैठक में लिए जाने वाले फैसलों और अधिकारियों को दिए जाने वाले निर्देशों पर सभी की नजर है।











