उत्तराखंड- यहां गुलदार का आतंक: चारा लेने गए बुजुर्ग को बनाया निवाला, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कमंद गांव में गुलदार के हमले से दहशत फैल गई है। शुक्रवार शाम चारा-पत्ती लेने गए एक बुजुर्ग को गुलदार ने हमला कर मौत के घाट उतार दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीण वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार कमंद गांव निवासी 62 वर्षीय मोहन चंद्र मलासी शुक्रवार शाम करीब साढ़े छह बजे घर से करीब 200 मीटर दूर खेतों की ओर बकरियों के लिए चारा-पत्ती लेने गए थे। बताया जा रहा है कि जैसे ही वह पेड़ से चारा काटकर नीचे उतरे, पहले से घात लगाए बैठे गुलदार ने उन पर हमला कर दिया।
काफी देर तक जब वह घर नहीं लौटे तो परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान खेत में उनकी दरांती और चप्पल पड़ी मिली। इसके बाद ग्रामीण खून के निशानों और पदचिह्नों के सहारे आगे बढ़े, जहां करीब 300 मीटर दूर उनका क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ।
वन विभाग के खिलाफ फूटा गुस्सा
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। ग्राम प्रधान साधना देवी ने कहा कि गांव में लंबे समय से गुलदार की आवाजाही बनी हुई है और कई बार वन विभाग को इसकी सूचना दी गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने कहा, “अगर गांव बचाने हैं तो गुलदारों को मार दो और अगर गुलदार बचाने हैं तो ग्रामीणों को मरने दो। लोग हर दिन जान जोखिम में डालकर जी रहे हैं।”
ग्रामीणों का कहना है कि शाम होते ही गांवों में डर का माहौल बन जाता है। खेतों और जंगल की ओर जाना अब खतरे से खाली नहीं रहा।
विधायक के न पहुंचने पर भी नाराजगी
घटना के बाद स्थानीय विधायक के मौके पर नहीं पहुंचने को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र सिंह ने कहा कि पौड़ी से कमंद गांव की दूरी मात्र 9 किलोमीटर है, लेकिन घटना के कई घंटे बाद तक कोई जनप्रतिनिधि गांव नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों ने बताया कि यह इलाका सुबोध उनियाल के गृह क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद क्षेत्र में गुलदार के हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
पांचवीं मौत से दहशत
बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में गुलदार के हमलों में यह पांचवीं मौत है। इससे पहले 23 अप्रैल को बमठी गांव में सीता देवी की मौत हुई थी। वहीं 9 मार्च को बालमणा में एक राजमिस्त्री, 15 जनवरी को बाड़ा गांव में नेपाली मूल के व्यक्ति और पिछले साल दिसंबर में गजल्ड गांव में एक ग्रामीण की गुलदार के हमले में जान जा चुकी है।
गुलदार को आदमखोर घोषित करने की मांग
गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ महातिम यादव ने बताया कि घटना की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से बातचीत कर संबंधित गुलदार को आदमखोर घोषित किए जाने का अनुरोध किया गया है।








