उत्तराखंड- डार्क वेब से उत्तराखंड की अदालतों पर ‘साइबर अटैक’! चौथे दिन भी बम धमकी, STF का बड़ा खुलासा
अमेजन क्लाउड और टोर ब्राउजर का इस्तेमाल, इंटरनेशनल सिंडिकेट की आशंका; हाईकोर्ट से लेकर चार जिलों की अदालतें खाली कराई गईं

देहरादून/नैनीताल– उत्तराखंड में अदालतों को बम से उड़ाने की धमकियों का सिलसिला लगातार चौथे दिन भी जारी रहा। गुरुवार को नैनीताल हाईकोर्ट समेत देहरादून, नैनीताल और चंपावत की जिला अदालतों को धमकी भरे ईमेल भेजे गए। सूचना मिलते ही सभी कोर्ट परिसरों को एहतियातन खाली कराकर छावनी में तब्दील कर दिया गया।

घंटों चली तलाशी के बावजूद कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली, लेकिन इन झूठी धमकियों ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
🔎 STF का खुलासा: लोकल नहीं, सुनियोजित साइबर साजिश
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने पूरे घटनाक्रम को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि यह किसी स्थानीय शरारती तत्व की हरकत नहीं, बल्कि एक संगठित साइबर साजिश का हिस्सा है।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि धमकी भरे ईमेल भेजने के लिए डार्क वेब, टोर (Tor) ब्राउजर और अमेजन क्लाउड सर्वर का इस्तेमाल किया गया है।
एसएसपी ने बताया कि संबंधित सर्विस प्रोवाइडर्स से तकनीकी जानकारी मांगी गई है और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर आरोपियों को ट्रैक करने की कोशिश की जा रही है।
🧠 मकसद क्या है?
एसटीएफ के मुताबिक इन ‘होक्स कॉल’ या झूठी धमकियों का मुख्य उद्देश्य दहशत फैलाना और न्यायिक व्यवस्था को बाधित करना है।
अदालतें संवेदनशील स्थल हैं, जहां रोजाना हजारों लोग अपने मामलों के लिए पहुंचते हैं। कोर्ट का कामकाज रुकने से आम जनता सीधे प्रभावित होती है।
ईमेल में ‘पाकिस्तान DMK मॉडल जिंदाबाद’ जैसे नारे लिखे गए हैं, जिसे जांच एजेंसियां भटकाने या प्रोपेगैंडा फैलाने की कोशिश मान रही हैं।
⚖️ देहरादून कोर्ट में क्या हुआ?
गुरुवार सुबह देहरादून डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज को धमकी भरा ईमेल मिला। सूचना मिलते ही पुलिस, बम निरोधक दस्ता (BDS), डॉग स्क्वॉड और खुफिया एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं।
बार काउंसिल अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल के अनुसार सुरक्षा कारणों से पूरे परिसर को खाली करा दिया गया और दिनभर न्यायिक कार्य ठप रहा।
हालांकि सघन जांच के बाद कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई।

🌐 ‘मनोवैज्ञानिक युद्ध’ की आशंका
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यह भारत के खिलाफ चलाया जा रहा एक ‘साइकोलॉजिकल वारफेयर’ हो सकता है। आशंका जताई जा रही है कि किसी इंटरनेशनल सिंडिकेट या विदेशी एजेंसी का हाथ हो सकता है, जो डार्क वेब के जरिए कम लागत में अधिक नुकसान पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
डार्क वेब, वीपीएन और प्रॉक्सी सर्वर के जरिए अपराधी अपनी पहचान और लोकेशन छुपा लेते हैं, जिससे जांच और मुश्किल हो जाती है।
📉 करोड़ों का नुकसान, न्याय प्रक्रिया पर असर
भले ही धमकियां झूठी साबित हो रही हों, लेकिन इनका असर वास्तविक है। कोर्ट खाली कराने से महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई टल रही है।
इससे पहले 2024 में एयरलाइंस कंपनियों को 79 फर्जी बम कॉल्स का सामना करना पड़ा था, जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था। इसी तरह कई स्कूलों को भी डार्क वेब नेटवर्क के जरिये धमकियां मिल चुकी हैं।
🚨 एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती
उत्तराखंड की अदालतों को मिल रही ये धमकियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी परीक्षा बन गई हैं। जब तक इस साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश नहीं होता, तब तक किसी भी खतरे को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
जांच एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हैं।









