उत्तराखंड- एक नौकरी और दो दावेदार… वन निगम कर्मचारी की मौत के बाद पत्नियों में विवाद, डेढ़ साल से कोर्ट में मामला

रामनगर न्यूज़- वन निगम के एक कर्मचारी की मौत के बाद मृतक आश्रित की नौकरी को लेकर उसकी दो पत्नियां आमने-सामने आ गई हैं। दोनों महिलाओं ने खुद को मृतक कर्मचारी प्रेम राम की पत्नी बताते हुए नौकरी पर अपना दावा पेश किया है। विवाद के चलते करीब डेढ़ साल से नियुक्ति की प्रक्रिया अटकी हुई है। मामला पहले परिवार न्यायालय और अब जिला न्यायालय में विचाराधीन है।
नौकरी के साथ ही प्रेम राम के ईपीएफ, ईएल और अन्य देयकों का भुगतान भी विवाद में फंसा हुआ है। वन निगम फिलहाल अदालत के फैसले का इंतजार कर रहा है।
कालाढूंगी में दूसरी पत्नी के साथ रहते थे प्रेम राम
प्रेम राम वन निगम के कालाढूंगी क्षेत्र में फोर्थ क्लास कर्मचारी थे। वह दूसरी पत्नी के साथ कालाढूंगी में रहते थे, जबकि पहली पत्नी हल्द्वानी में अलग रहती थी।
दिसंबर 2024 में प्रेम राम की मौत के बाद कालाढूंगी में रह रही पत्नी ने मृतक आश्रित के तौर पर नौकरी के लिए वन निगम में दस्तावेज जमा किए। इसी दौरान पहली पत्नी ने भी नौकरी पर अपना दावा पेश कर दिया। इसके बाद नियुक्ति की प्रक्रिया विवाद में फंस गई।
पहले परिवार न्यायालय, अब जिला न्यायालय में मामला
मृतक आश्रित की नौकरी के दावे को लेकर मामला पहले परिवार न्यायालय पहुंचा। अब यह जिला न्यायालय में विचाराधीन है। दोनों पक्षों की ओर से अपने-अपने दावे और दस्तावेज न्यायालय के सामने रखे गए हैं।
वन निगम ने नियुक्ति की प्रक्रिया फिलहाल रोक रखी है। निगम अधिकारियों का कहना है कि अदालत के आदेश और विधिक राय के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पांच बच्चों के भविष्य पर भी टिका फैसला
प्रेम राम के परिवार में कुल पांच बच्चे हैं। कालाढूंगी में रह रही पत्नी से तीन बेटियां और एक बेटा है, जबकि पहली पत्नी से एक बेटी है। ऐसे में नौकरी के फैसले का असर दोनों परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ना तय है।
कालाढूंगी में रह रही पत्नी आर्थिक संकट से जूझ रही है। उसका कहना है कि परिवार और बच्चों की पढ़ाई का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
लकड़ियां बेचकर चला रही परिवार, रोज 200-300 रुपये की कमाई
बताया जा रहा है कि आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण महिला जंगल से लकड़ियां बीनकर उन्हें बेचती है। इससे उसे रोजाना करीब 200 से 300 रुपये की कमाई हो पाती है। इसी आमदनी से वह बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाने की कोशिश कर रही है।
महिला ने हाल ही में रामनगर वन निगम के डीएसएम मुदित आर्या से मुलाकात कर मृतक आश्रित के तौर पर नौकरी देने की मांग की। उसका कहना है कि यदि उसे नौकरी मिलती है तो बच्चों की पढ़ाई और परिवार का खर्च संभालने में मदद मिलेगी।
पहली पत्नी को भरण-पोषण के लिए वेतन से मिलती थी राशि
डीएसएम मुदित आर्या के अनुसार, प्रेम राम और पहली पत्नी के बीच विवाद के बाद दोनों अलग-अलग रह रहे थे। कर्मचारी दूसरी शादी के बाद दूसरी पत्नी को अल्मोड़ा से कालाढूंगी ले आया था।
पहली पत्नी ने न्यायालय में भरण-पोषण का मामला दायर किया था। न्यायालय के आदेश के अनुसार प्रेम राम के वेतन से निर्धारित राशि काटकर पहली पत्नी को दी जाती रही।
दिसंबर 2024 में प्रेम राम की मौत के बाद दोनों महिलाओं ने खुद को पत्नी बताते हुए मृतक आश्रित नौकरी का दावा किया। इसी विवाद के कारण नियुक्ति का मामला न्यायालय तक पहुंच गया।
ईपीएफ, ईएल समेत अन्य देयक भी अटके
नौकरी के विवाद के साथ ही मृतक कर्मचारी के ईपीएफ, ईएल और अन्य देयकों के भुगतान का मामला भी अटका हुआ है। वन निगम इन मामलों में भी कानूनी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहा है।
अब कोर्ट के फैसले का इंतजार
वन निगम के सामने फिलहाल अदालत के निर्णय का इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। डीएसएम के अनुसार, निगम मामले में विधिक राय भी लेगा और न्यायालय के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा।
यानी प्रेम राम की मौत के करीब डेढ़ साल बाद भी यह तय नहीं हो पाया है कि मृतक आश्रित की नौकरी किस दावेदार को मिलेगी। अदालत के फैसले के बाद ही नियुक्ति के साथ ईपीएफ, ईएल और अन्य देयकों के भुगतान का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।








