उत्तराखण्डगढ़वाल,

उत्तराखंड: फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों से नौकरी पाने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर की सेवा समाप्त

उत्तराखंड के उच्च शिक्षा विभाग ने राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी, यमकेश्वर में कार्यरत इतिहास विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उमेश त्यागी को फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी प्राप्त करने के मामले में सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं।

 

जानकारी के अनुसार डॉ. उमेश त्यागी की नियुक्ति राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी में कला संकाय के अंतर्गत इतिहास विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुई थी। नियुक्ति के दौरान प्रस्तुत किए गए शैक्षणिक अभिलेखों की सत्यता पर संदेह जताते हुए विभाग को शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद मामले की विस्तृत जांच कराई गई।

यह भी पढ़ें 👉  देहरादून- अब पासपोर्ट बनवाने को नहीं लगाने होंगे चक्‍कर, अब होने जा रही है ये व्यवस्था

 

जांच के दौरान डॉ. त्यागी द्वारा प्रस्तुत बीए प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष की अंकतालिकाओं में गंभीर विसंगतियां पाई गईं। उच्च शिक्षा विभाग ने संबंधित अभिलेखों का सत्यापन चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से कराया, जहां जांच में यह दस्तावेज विश्वविद्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए।

 

 

विभागीय अधिकारियों के अनुसार जांच प्रक्रिया के दौरान डॉ. त्यागी को अपना पक्ष रखने और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया, लेकिन वे निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं हुए और न ही संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत कर सके। इसके बाद उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के तहत उनकी सेवा समाप्ति का प्रस्ताव तैयार कर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को भेजा गया, जिसे उन्होंने मंजूरी प्रदान कर दी।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी में मानसिक रूप से कमजोर युवती से सामूहिक दुष्कर्म, ई-रिक्शा चालक समेत दो आरोपियों की तलाश में पुलिस

 

 

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की गरिमा और विद्यार्थियों के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर सरकारी सेवा प्राप्त करना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

यह भी पढ़ें 👉  युवा समाजसेवी पीयूष जोशी की मेहनत लाई रंग सामुदायिक स्वाथ्य केंद्र का हुआ हस्तांतरण

 

इस कार्रवाई को उच्च शिक्षा विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच को और अधिक सख्ती से किया जाएगा।