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जीत ही टिकट का पैमाना: अनावश्यक दावेदारी से बचें दायित्वधारी – महेंद्र भट्ट

देहरादून न्यूज़- महेंद्र भट्ट ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर साफ संदेश दिया है कि पार्टी में टिकट का एकमात्र आधार जीतने की क्षमता होगी। उन्होंने दो-टूक कहा कि दायित्वधारी और पदाधिकारी अनावश्यक दावेदारी कर विवाद की स्थिति न बनाएं। पार्टी को जो जिताऊ चेहरा नजर आएगा, उसे स्वयं टिकट दे दिया जाएगा।

 

वही महेंद्र भट्ट ने कहा कि फिलहाल सभी के लिए कमल का फूल ही प्रत्याशी है और कार्यकर्ताओं को उसी को जिताने के लिए काम करना चाहिए।

 

जीतने की क्षमता ही कसौटी
प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस बार टिकट वितरण में किसी प्रकार का दबाव या व्यक्तिगत दावेदारी काम नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार में जिन कार्यकर्ताओं को दायित्व दिए गए हैं, उनका प्राथमिक उद्देश्य पार्टी को चुनाव जिताना होना चाहिए, न कि टिकट की होड़ में शामिल होना।

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हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि सर्वे में किसी दायित्वधारी का चेहरा ही जीत का सबसे बड़ा आधार बनकर सामने आता है तो पार्टी उसे प्रत्याशी बनाने से पीछे नहीं हटेगी।

 

भट्ट ने बताया कि पार्टी ने उन 23 विधानसभा सीटों पर विशेष फोकस किया है, जहां पिछले चुनाव में जीत नहीं मिल सकी थी। प्रत्याशी चयन के लिए पांच अलग-अलग सर्वे कराए जाएंगे और अंतिम निर्णय जीत की संभावना के आधार पर होगा।

 

मार्च में हो सकता है कैबिनेट विस्तार
लंबे समय से रिक्त चल रहे मंत्रिमंडल के पदों को लेकर भी भट्ट ने संकेत दिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कैबिनेट विस्तार एक साथ होने की चर्चा है। संभावना है कि मार्च में उत्तराखंड में मंत्रिमंडल का विस्तार हो, जिससे पांच खाली पदों को भरा जा सके। साथ ही दायित्वधारियों की नई सूची भी जल्द केंद्र से फाइनल होकर आने वाली है।

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कांग्रेस पर निशाना
विपक्ष पर हमला बोलते हुए भट्ट ने कहा कि कांग्रेस जनसरोकारों से कट चुकी है और केवल भावनात्मक मुद्दों की राजनीति कर रही है। अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस चार चुनाव लड़ चुकी है और हर बार भाजपा को जीत मिली है, जिससे स्पष्ट है कि जनता विकास के साथ खड़ी है।

 

चैंपियन परिवार को अनुशासन की नसीहत
हाल ही में कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के आवास पर हुई मुलाकात को लेकर भट्ट ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया। हालांकि उन्होंने अनुशासन और भाषा की मर्यादा बनाए रखने की सलाह भी दी। मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा कि “मनमानी करना राजाओं के स्वभाव का हिस्सा हो सकता है, लेकिन सोशल मीडिया के इस दौर में सावधानी और पार्टी अनुशासन का पालन जरूरी है।”

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नेता न होते तो संघ प्रचारक होते’
एक सवाल के जवाब में भट्ट ने कहा कि यदि वे राजनीति में न होते तो निश्चित रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में कार्य कर रहे होते।

 

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के इन बयानों से स्पष्ट है कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति के स्तर पर सख्त और स्पष्ट रुख अपनाने जा रही है, जहां जीत ही टिकट का अंतिम और एकमात्र आधार होगी।