बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग तेज, 26वें दिन तिवारी नगर पहुंची पदयात्रा, 27 सितंबर को सड़कों पर उमड़ेगा जनसैलाब

लालकुआं न्यूज़- बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग को लेकर वन अधिकार संगठन का आंदोलन लगातार जोर पकड़ रहा है। संगठन की ओर से निकाली जा रही पदयात्रा सोमवार को 26वें दिन तिवारी नगर पहुंची। इस दौरान कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने घर-घर संपर्क कर लोगों से संवाद किया। पदयात्रा में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल हुए।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। सरकार को जल्द से जल्द बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की अधिसूचना जारी करनी होगी। संगठन ने चेतावनी दी कि आचार संहिता लागू होने से पहले यदि अधिसूचना जारी नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और इसके गंभीर परिणाम सरकार को भुगतने पड़ सकते हैं।
DLC से मंजूरी के बावजूद अधिसूचना का इंतजार
वन अधिकार संगठन के अनुसार, पीढ़ियों से वन क्षेत्र पर निर्भर बिंदुखत्तावासी वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत राजस्व ग्राम की पात्रता रखते हैं। बिंदुखत्ता की 32 बस्तियों/वन ग्रामों के 11,703 दावेदारों की ओर से वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(1)(j) के तहत सामुदायिक दावा प्रस्तुत किया गया था।
संगठन का कहना है कि 19 जून 2024 को जिला स्तरीय वन अधिकार समिति (DLC) ने इस सामुदायिक दावे को सर्वसम्मति से मंजूरी देते हुए राजस्व ग्राम की अधिसूचना और बंदोबस्ती की कार्यवाही के लिए शासन को भेज दिया था। इसके बावजूद अब तक अधिसूचना जारी नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
वर्षों से चल रही मांग, सरकार पर उठाए सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले वर्षों में अधिकारियों और सरकार के जिम्मेदार प्रतिनिधियों से सैकड़ों बार मुलाकात की जा चुकी है। इसके अलावा लगातार ज्ञापन भी दिए गए, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
वन अधिकार संगठन का कहना है कि राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिलने के कारण बिंदुखत्ता के ग्रामीण केंद्र और राज्य सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पूरी तरह नहीं उठा पा रहे हैं। इसमें गौला तटबंध के स्थायी समाधान का मुद्दा भी प्रमुख रूप से शामिल है।
27 सितंबर को विशाल रैली का ऐलान
संगठन की ओर से 15 अगस्त 2026 से पदयात्रा और जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में अब 27 सितंबर 2026 को शहीद स्मारक से तहसील लालकुआं तक विशाल रैली और धरना-प्रदर्शन प्रस्तावित है। संगठन का दावा है कि रैली में 10 हजार से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं।
वन अधिकार संगठन ने आरोप लगाया कि उपजिलाधिकारी लालकुआं के माध्यम से मुख्यमंत्री को दर्जनों ज्ञापन भेजे जा चुके हैं। संगठन का कहना है कि इन ज्ञापनों के साथ महत्वपूर्ण पत्र और दस्तावेज भी बार-बार शासन को भेजे गए, लेकिन लंबे समय से उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
‘अब आश्वासन नहीं, अधिसूचना चाहिए’
पदयात्रा में शामिल ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि जब DLC द्वारा सामुदायिक दावा सर्वसम्मति से स्वीकृत किया जा चुका है और शासन के पास इससे जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज व पत्र मौजूद हैं, तो फिर राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने में देरी का कोई औचित्य नहीं है।
ग्रामीणों ने DLC की रिपोर्ट के आधार पर तत्काल बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने की मांग की। साथ ही 27 सितंबर को प्रस्तावित विशाल रैली को निर्णायक बनाने के लिए अधिक से अधिक लोगों से इसमें शामिल होने का आह्वान किया।
ये लोग रहे मौजूद
पदयात्रा में संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट, समिति अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी, सचिव बलवंत बिष्ट, रमेश गोस्वामी, सोहन लाल, कैप्टन इंद्र सिंह पनेरी, प्रकाश उत्तराखंडी, दीपक रौतेला, भगवान सिंह कठायत, दीपक जोशी, भरत नेगी, भगवान सिंह धामी, माधो सिंह अरमोली, गंगा देवी, मीना मेहता, रेखा कार्की, लीला देवी, नवीन जोशी, कैप्टन कुशाल सिंह कोश्यारी, कैप्टन बलवंत सिंह बिष्ट, कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट, कमल सिंह बिष्ट, नंदन सिंह राठौर, नंदन सिंह गड़िया, दीपक पाठक, दीपक कर्नाटक, प्रकाश मिश्रा, दीपक नेगी, दौलत सिंह कोरंगा, मनोज कोरंगा, भूपेश जोशी, धन सिंह गढ़िया, करम सिंह कोरंगा, कैप्टन कुंदन सिंह रावत, भवान कार्की, कैप्टन मंगल सिंह मेहता, आन सिंह धामी, किशन जेठा, बलवंत परिहार, नरेश टाकुली, संध्या डालाकोटी, राकेश कुनियाल, राम सिंह शाह, हयात सिंह गढ़िया, बलवंत सम्मल, देवेंद्र दानू समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।








