बनभूलपुरा रेलवे भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में टली सुनवाई, अब 17 सितंबर को होगी सुनवाई; 50 हजार से ज्यादा लोगों की टिकी नजर

हल्द्वानी न्यूज़- बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। मामला कोर्ट की सूची में तीसरे नंबर पर था, लेकिन इमरजेंसी मामलों की सुनवाई के चलते इसे आगे बढ़ा दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला इमरजेंसी सुनवाई की श्रेणी में नहीं आता। अब मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी। फैसले और आगे की सुनवाई को लेकर बनभूलपुरा समेत पूरे हल्द्वानी की नजर सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है।
सुनवाई की संभावनाओं को देखते हुए हल्द्वानी जिला प्रशासन और पुलिस पहले से ही अलर्ट मोड पर रहे। बनभूलपुरा क्षेत्र को जोन और सेक्टर में बांटकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया था। संवेदनशील इलाकों में आंसू गैस दस्ते, दंगा-रोधी दस्ते और सशस्त्र पुलिस बल तैनात किए गए। इसके साथ ही ड्रोन के जरिए क्षेत्र की निगरानी की व्यवस्था भी की गई।
यह पूरा मामला हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के आसपास की जमीन पर बसी बनभूलपुरा, गफूर बस्ती, ढोलक बस्ती और इंदिरा नगर समेत अन्य बस्तियों से जुड़ा है। रेलवे भूमि पर अतिक्रमण को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। मामले में बड़ी संख्या में परिवारों के प्रभावित होने की आशंका के चलते यह हल्द्वानी के सबसे संवेदनशील और चर्चित मामलों में शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 30.040 हेक्टेयर सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण का मामला है। इस क्षेत्र में लगभग 4,365 मकान बताए गए हैं, जिनमें 50 हजार से अधिक लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। यही वजह है कि हर सुनवाई पर स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रशासन की भी नजर बनी रहती है।
वहीं, रेलवे की ओर से रेलवे लाइन के रियलाइन्मेंट के लिए करीब 30.65 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता बताई गई है। ऐसे में रेलवे की जमीन और वहां बसे लोगों के अधिकार को लेकर चल रहा यह विवाद आने वाले दिनों में भी महत्वपूर्ण बना रहेगा।
बुधवार को सुनवाई टलने के बाद अब सभी की निगाहें 17 सितंबर पर टिक गई हैं। अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर क्या रुख अपनाता है, इसे लेकर बनभूलपुरा क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बरकरार रखी जा रही है।






