उत्तराखण्डकुमाऊं,

बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम की मांग पर आर-पार की तैयारी, 27 सितंबर की रैली में लिखित आश्वासन की मांग

लालकुआं न्यूज़- बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर वन अधिकार संगठन की पदयात्रा लगातार जारी है। आंदोलन के 28वें दिन तिवारी नगर स्थित वनदेवी मैया मंदिर से शुरू हुई पदयात्रा हाट कालिका मंदिर पहुंची। पदयात्रा में सैकड़ों महिला-पुरुषों ने हिस्सा लिया। इस दौरान लोकगीतों और जनगीतों के जरिए ग्रामीणों से 27 सितंबर को प्रस्तावित विशाल रैली एवं जनसभा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया गया।

 

 

पदयात्रा का रात्रि विश्राम हाट कालिका मंदिर में हुआ। संगठन के अनुसार 12 सितंबर की सुबह आठ बजे पदयात्रा अगले पड़ाव के लिए रवाना होगी।

 

 

40-50 साल से संघर्ष, अब आर-पार की तैयारी

पदयात्रा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाए जाने की मांग को लेकर ग्रामीण पिछले 40 से 50 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। हर बार आश्वासन देकर उनकी मांग को टाल दिया जाता है। वक्ताओं ने कहा कि बिंदुखत्ता देश में एक अनोखा उदाहरण है, जहां ग्रामीण लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में मतदान करते हैं, लेकिन उन्हें अपनी ग्राम पंचायत चुनने का अधिकार नहीं है।

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उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की मांग सिर्फ राजस्व ग्राम की अधिसूचना तक सीमित नहीं है। राजस्व ग्राम का दर्जा, पंचायती राज व्यवस्था और भूमि पर मालिकाना अधिकार ग्रामीणों के मूल अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल हैं।

 

 

डीएम कैंप कार्यालय पहुंचा प्रतिनिधिमंडल

पदयात्रा के बाद वन अधिकार संगठन एवं पूर्व सैनिक संगठन का करीब 60 से 70 लोगों का प्रतिनिधिमंडल हल्द्वानी स्थित जिलाधिकारी कैंप कार्यालय पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को 27 सितंबर को प्रस्तावित विशाल रैली एवं जनसभा की अनुमति के संबंध में पत्र सौंपा और कार्यक्रम की पूरी जानकारी दी।

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प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि 27 सितंबर की रैली में इस बार कोई नया ज्ञापन नहीं दिया जाएगा। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया है कि रैली में स्वयं मुख्यमंत्री या उनके समकक्ष जिम्मेदार प्रतिनिधि उपस्थित होकर बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाए जाने के मुद्दे पर चर्चा करें और लिखित आश्वासन दें। इसके बाद ही रैली समाप्त की जाएगी।

 

 

लिखित आश्वासन नहीं मिला तो आंदोलन होगा तेज

संगठन ने साफ किया कि यदि निर्धारित समय-सीमा में सरकार की ओर से कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि रैली में उपस्थित नहीं होता है तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में रैली को क्रमिक अनशन में बदलने का निर्णय लिया जा सकता है।

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जिलाधिकारी को पत्र सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में संगठन अध्यक्ष उमेश भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी, बलवंत बिष्ट, कैप्टन इंद्र सिंह पनेरी, रमेश गोस्वामी, दीपक जोशी, दीपक नेगी, दीपक रौतेला, कविराज धामी, संध्या डालाकोटी, मीना कपिल, हीरा सिंह बिष्ट, कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट, सूबेदार खुशाल सिंह कोश्यारी, सूबेदार माधो सिंह अरमोली, सूबेदार कमल सिंह बिष्ट, सूबेदार बलवंत सिंह बिष्ट, बसंत पांडे, दीपक पांडा, नंदन बोरा, राजेंद्र पांडा, गंगा सिंह दानू, मीना मेहता, रेखा कार्की, नारायण सिंह कोरंगा, बलवंत परिहार, गंगा देवी, लीला देवी, गोपाल नेगी, भवान सिंह कठायत, ममता दानू सहित अनेक लोग शामिल रहे।