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( बड़ी खबर) उत्तराखंड में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर रोक, होटल-रेस्टोरेंट कारोबारियों की बढ़ीं मुश्किलें

सप्लाई प्रभावित होने से स्टॉक की कमी, फिलहाल अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को ही मिल रहे सिलेंडर

देहरादून न्यूज़- उत्तराखंड में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति फिलहाल रोक दी गई है। पूर्ति विभाग के एडिशनल कमिश्नर पीएस पांगती ने बताया कि पर्याप्त सप्लाई नहीं मिलने के कारण यह फैसला लेना पड़ा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण मुख्य स्रोत से गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे प्रदेश में स्टॉक की कमी हो गई है।

 

अधिकारियों के अनुसार, उपलब्ध सीमित स्टॉक को देखते हुए फिलहाल कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बंद कर दी गई है। हालांकि अत्यावश्यक सेवाओं को प्रभावित न होने देने के लिए अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

 

कारोबारियों की बढ़ीं मुश्किलें
कमर्शियल गैस की सप्लाई रुकने से होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। रेस्टोरेंट एसोसिएशन देहरादून के सदस्य रमन चड्ढा ने बताया कि इस समय गैस सिलेंडरों की शॉर्टेज जरूर है, लेकिन होटल और रेस्टोरेंट फिलहाल अपने उपलब्ध स्टॉक से काम चला रहे हैं।

 

उन्होंने कहा कि जब तक स्टॉक खत्म नहीं होता, तब तक काम चलता रहेगा, लेकिन अगर सरकार की ओर से गैस की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई तो होटल और रेस्टोरेंट बंद करना मजबूरी हो सकती है। फिलहाल कई कारोबारियों ने इंडक्शन और अन्य वैकल्पिक साधनों से काम चलाना शुरू कर दिया है।

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व्यापारियों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो राज्य के पर्यटन और होटल उद्योग को बड़ा झटका लग सकता है। ढाबों, रेस्टोरेंट और होटलों में खाना बनाना मुश्किल हो जाएगा, जिसका असर आम लोगों और पर्यटकों पर भी पड़ेगा।

 

क्या है एसेंशियल कमोडिटी एक्ट
एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 ऐसा कानून है, जो सरकार को जरूरी वस्तुओं जैसे अनाज, दालें, खाद्य तेल, दवाइयां और ईंधन की आपूर्ति और कीमतों को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। इसे आम भाषा में जमाखोरी रोकने वाला कानून भी कहा जाता है।
जब किसी जरूरी वस्तु की कमी होने लगती है या उसकी कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं, तो सरकार इस कानून के तहत व्यापारियों के लिए स्टॉक की सीमा तय कर देती है, ताकि कोई भी व्यापारी जरूरत से ज्यादा सामान जमा न कर सके।

 

गैस की सप्लाई को चार कैटेगरी में बांटा गया
सरकार ने गैस की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए सप्लाई को चार कैटेगरी में बांटा है।

पहली कैटेगरी: इसमें घरेलू रसोई गैस, PNG और वाहनों में इस्तेमाल होने वाली CNG शामिल हैं। इनकी सप्लाई पहले की तरह जारी रहेगी।

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दूसरी कैटेगरी: खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को लगभग 70 प्रतिशत गैस दी जाएगी, लेकिन उन्हें यह साबित करना होगा कि गैस का इस्तेमाल खाद उत्पादन में ही किया गया है।

तीसरी कैटेगरी: नेशनल ग्रिड से जुड़े चाय कारखानों और अन्य बड़े उद्योगों को उनकी जरूरत की करीब 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी।

चौथी कैटेगरी: शहरों के गैस नेटवर्क से जुड़े छोटे उद्योग, होटल और रेस्टोरेंट को उनकी पुरानी खपत के आधार पर लगभग 80 प्रतिशत गैस दी जाएगी।

 

संकट से निपटने के लिए सरकार के कदम
गैस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने कई जरूरी कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो सप्लाई की लगातार समीक्षा करेगी।

 

इसके अलावा देशभर में एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू कर दिया गया है, ताकि गैस की सप्लाई और स्टॉक को नियंत्रित किया जा सके। घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक किया जा सकेगा।

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गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी के समय OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी अनिवार्य कर दिया गया है।

 

गैस सिलेंडरों के दाम भी बढ़े
तीन दिन पहले सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की है। अब दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का एलपीजी सिलेंडर 913 रुपये का मिल रहा है, जबकि पहले इसकी कीमत 853 रुपये थी।

 

वहीं 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद यह अब 1883 रुपये का हो गया है। नई कीमतें 7 मार्च से लागू हो चुकी हैं।

 

कब तक सुधरेंगे हालात
इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक (LPG) के.एम. ठाकुर का कहना है कि उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है और पैनिक बुकिंग से बचना चाहिए। सरकार वैकल्पिक स्रोतों से गैस कार्गो मंगाने की कोशिश कर रही है।

 

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऊर्जा संकट को कम करने के लिए कई देश अपने इमरजेंसी तेल भंडार से सप्लाई जारी करने पर विचार कर रहे हैं। रूस और अल्जीरिया से भी अतिरिक्त कच्चे तेल की सप्लाई आने की उम्मीद जताई जा रही है।