UPI Payment पर बड़ा अपडेट! ₹2,000 से ज्यादा के लेनदेन पर ग्राहक नहीं देंगे MDR, सरकार ने दूर किया भ्रम

नई दिल्ली- UPI Payment को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि ₹2,000 से अधिक के पात्र UPI मर्चेंट लेनदेन पर लागू 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। बैंकों को इस संबंध में ग्राहकों के बीच फैली गलतफहमियों को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की बात कही गई है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, MDR से मिलने वाली राशि सरकार के खाते में नहीं जाएगी। यह रकम UPI से जुड़े पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल विभिन्न पक्षों, जिनमें बैंक और पेमेंट ऐप प्रदाता शामिल हैं, के बीच वितरित होगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR को सरकारी टैक्स या सरकार द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क नहीं माना जाना चाहिए।
नए नियम के तहत 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर ₹2,000 से अधिक की राशि के लिए 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजेक्शन रखी गई है। वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजेक्शन पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।
सरकार के अनुसार, ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान और निर्धारित शून्य-MDR श्रेणी के छोटे व्यापारियों के लेनदेन पर भी शुल्क नहीं लगेगा। सरकार ने बताया है कि कुल P2M UPI लेनदेन का करीब 96 प्रतिशत हिस्सा इस बदलाव से प्रभावित नहीं होगा।
MDR लागू होने की घोषणा के बाद यह आशंका जताई जा रही थी कि व्यापारी इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं या बड़े UPI भुगतान पर नकद भुगतान को बढ़ावा दिया जा सकता है। इसी को देखते हुए सरकार बैंकों और व्यापारी संगठनों के साथ बातचीत कर रही है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा है कि बैंकों के माध्यम से ग्राहकों को इस संबंध में सही जानकारी दी जाएगी और MDR को ग्राहकों से वसूलने की अनुमति नहीं होगी।
सरकार की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि MDR पर GST से जुड़े मुद्दे पर GST परिषद विचार कर सकती है। इस विषय पर आगे होने वाली चर्चा के बाद नियमों को लेकर और स्पष्टता आने की संभावना है।








