मिडिल क्लास की जेब पर डबल मार! पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमत बढ़ने के आसार

नई दिल्ली- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडरा रहे संकट का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल के चलते देश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी गैस की कीमतों में जल्द बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकारी तेल कंपनियों को मौजूदा समय में रोजाना करीब 1600 से 1700 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसकी बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल के बावजूद घरेलू स्तर पर ईंधन कीमतों में अभी तक कोई बढ़ोतरी न होना बताया जा रहा है।
15 मई के बाद बढ़ सकते हैं दाम
जानकारी के अनुसार 15 मई के बाद देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इजाफा किया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक संभावित बढ़ोतरी इस प्रकार हो सकती है—
- पेट्रोल-डीजल: 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो सकते हैं।
- घरेलू LPG सिलेंडर: 40 से 50 रुपये तक की बढ़ोतरी संभव।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार आम लोगों पर अचानक बोझ डालने के बजाय कीमतों में चरणबद्ध बढ़ोतरी कर सकती है। यानी एक साथ बड़ी वृद्धि के बजाय 2 से 4 रुपये की किश्तों में दाम बढ़ाए जा सकते हैं।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फिलहाल 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुका है, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी करीब 99 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमत 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 60 प्रतिशत एलपीजी विदेशों से आयात करता है। ऐसे में वैश्विक तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ रहा है।
आम आदमी पर पड़ेगा सीधा असर
ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ेगा।
- माल ढुलाई महंगी होने से फल, सब्जियों और जरूरी सामान के दाम बढ़ सकते हैं।
- ऑटो, टैक्सी और हवाई किराए में बढ़ोतरी हो सकती है।
- घरेलू गैस महंगी होने से मध्यम वर्ग के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने की अपील
हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से ईंधन की बचत करने की अपील की थी। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने, अनावश्यक यात्रा कम करने और जहां संभव हो वर्क फ्रॉम होम अपनाने की सलाह दी थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में भारत में ईंधन कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।








