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UPI पर MDR का असर! 10 अक्टूबर से ऑनलाइन पेमेंट बंद करेगी ये कंपनी

नई दिल्ली- यूपीआई (UPI) पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने की खबरों के बीच कारोबारियों की चिंता बढ़ने लगी है। औद्योगिक सामान के ऑनलाइन मार्केटप्लेस Pneucons ने 10 अक्टूबर 2026 से अपने प्लेटफॉर्म पर यूपीआई पेमेंट स्वीकार करना बंद करने का ऐलान किया है। कंपनी का कहना है कि नए MDR चार्ज के चलते उसके मुनाफे का बड़ा हिस्सा खत्म हो सकता है। खास बात यह है कि यूपीआई पेमेंट पर लगने वाला यह शुल्क ग्राहकों से नहीं, बल्कि कारोबारियों यानी मर्चेंट से लिया जाना है।

 

 

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होने की बात कही जा रही है। हालांकि, यह शुल्क सभी यूपीआई लेनदेन पर लागू नहीं होगा।

आखिर Pneucons ने UPI पेमेंट बंद करने का फैसला क्यों लिया?

Pneucons के को-फाउंडर प्रितेश लखानी के मुताबिक, कंपनी को प्रत्येक ऑर्डर पर टैक्स से पहले लगभग 0.5 प्रतिशत कमीशन मिलता है। ऐसे में यदि यूपीआई पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR देना पड़ता है, तो कंपनी की कमाई का बड़ा हिस्सा इसी शुल्क में चला जाएगा।

 

 

इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। यदि कोई ग्राहक 10,000 रुपये का सामान खरीदता है, तो कंपनी को 0.5 प्रतिशत कमीशन के रूप में 50 रुपये मिलते हैं। 18 प्रतिशत GST जोड़ने के बाद ग्राहक कुल 11,800 रुपये का भुगतान करता है।

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यदि पूरी भुगतान राशि पर 0.4 प्रतिशत MDR लगता है, तो यह शुल्क 47.20 रुपये होगा। यानी कंपनी को मिलने वाले 50 रुपये के कमीशन में से लगभग 47.20 रुपये MDR में चले जाएंगे। इस तरह कमीशन का करीब 94 प्रतिशत हिस्सा केवल पेमेंट शुल्क में खर्च हो सकता है।

 

 

कंपनी का कहना है कि इतनी कम कमाई वाले कारोबार में यह अतिरिक्त लागत उसके मुनाफे पर बड़ा असर डाल सकती है।

 

 

GST समेत पूरी रकम पर MDR लगने से बढ़ेगी लागत

Pneucons की एक और चिंता यह है कि कंपनी का कमीशन सामान की मूल कीमत के आधार पर तय होता है, जबकि MDR ग्राहक की ओर से चुकाई जाने वाली कुल रकम पर लग सकता है। इस कुल रकम में GST भी शामिल होता है।

 

 

इसके अलावा, MDR पर 18 प्रतिशत GST भी देना पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर, 47.20 रुपये के MDR पर लगभग 8.50 रुपये GST बनेगा।

 

 

हालांकि, पात्र कारोबारी इस GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम कर सकते हैं, लेकिन भुगतान पहले करना पड़ता है। इससे कारोबार की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) पर दबाव पड़ सकता है।

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UPI पेमेंट पर कितना लगेगा MDR चार्ज?

प्रस्तावित व्यवस्था के मुताबिक, सभी यूपीआई ट्रांजेक्शन पर MDR नहीं लगाया जाएगा। अलग-अलग लेनदेन और कारोबारी श्रेणियों के लिए अलग नियम बताए गए हैं।

 

 

  • 2,000 रुपये तक के मर्चेंट UPI पेमेंट: इन पर MDR नहीं लगेगा।
  • 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा P2M ट्रांजेक्शन: 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा।
  • 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजेक्शन: बताए गए प्रावधान के अनुसार MDR अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा।
  • P2P ट्रांजेक्शन: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले यूपीआई भुगतान पर MDR नहीं लगेगा।
  • कुछ जरूरी और कम मार्जिन वाले क्षेत्र: ईंधन, रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और कृषि इनपुट जैसी श्रेणियों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के संबंधित ट्रांजेक्शन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR बताए जाने की बात है।

 

हालांकि, इन दरों और श्रेणियों की अंतिम लागू स्थिति की आधिकारिक पुष्टि करना जरूरी है।

 

 

क्या ग्राहकों को भी देना होगा UPI चार्ज?

यूपीआई MDR का बोझ मर्चेंट पर पड़ना है, ग्राहक पर नहीं। यानी यदि कोई ग्राहक 10,000 रुपये का भुगतान यूपीआई से करता है, तो उसे केवल यूपीआई इस्तेमाल करने के लिए अलग से 0.4 प्रतिशत शुल्क नहीं देना चाहिए।

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हालांकि, कारोबारियों के लिए यह शुल्क अतिरिक्त लागत बन सकता है। खासकर उन कंपनियों के लिए, जो प्रत्येक ऑर्डर पर बहुत कम कमीशन कमाती हैं। ऐसी स्थिति में पेमेंट की लागत बढ़ने से उनके मुनाफे पर सीधा असर पड़ सकता है।

 

 

क्या दूसरी कंपनियां भी बंद करेंगी UPI पेमेंट?

फिलहाल Pneucons की ओर से यूपीआई पेमेंट बंद करने का फैसला सामने आया है। अन्य कंपनियां भी ऐसा कदम उठाएंगी या नहीं, इस बारे में अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है।

 

 

हालांकि, MDR को लेकर कारोबारियों की चिंता बढ़ सकती है। कम कमीशन पर काम करने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और छोटे कारोबारियों के लिए पेमेंट शुल्क एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

 

 

कुल मिलाकर, Pneucons का फैसला इस बात को उजागर करता है कि कम मार्जिन वाले कारोबार में भुगतान पर लगने वाला छोटा-सा शुल्क भी कमाई का बड़ा हिस्सा खत्म कर सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि MDR से जुड़े नियमों पर सरकार और संबंधित संस्थाएं क्या रुख अपनाती हैं और इसका ऑनलाइन कारोबार पर कितना असर पड़ता है।