उत्तराखण्डकुमाऊं,

बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र बनवाना अब नहीं होगा आसान, दो साल बाद मजिस्ट्रेट की जांच जरूरी

पिथौरागढ़- बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र समय पर नहीं बनवाने वाले अभिभावकों की मुश्किलें अब बढ़ने वाली हैं। निर्धारित समय सीमा के बाद जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अब पहले जैसी आसान प्रक्रिया उपलब्ध नहीं होगी। दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद जन्म प्रमाण पत्र जारी करने से पहले प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट स्तर से मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में देरी का उचित कारण प्रमाणित होने के बाद ही प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

 

 

नई व्यवस्था के लागू होने से जिले में सैकड़ों अभिभावकों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। खासकर रोजगार के सिलसिले में जिले से बाहर रहने वाले अभिभावकों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में बच्चों के पिता दूसरे राज्यों में काम करते हैं और घर पर माताओं के अकेले होने के कारण समय पर जन्म प्रमाण पत्र नहीं बन पाया।

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पहले आसान थी प्रक्रिया

अब तक नगरीय क्षेत्रों में बच्चे के जन्म के 21 दिन के भीतर और ग्रामीण क्षेत्रों में एक वर्ष तक निशुल्क जन्म प्रमाण पत्र बनाया जाता था। निर्धारित अवधि में प्रमाण पत्र नहीं बन पाने की स्थिति में भी अभिभावक शपथ पत्र और निर्धारित शुल्क जमा कर प्रमाण पत्र बनवा लेते थे।

 

 

हालांकि, अब दो वर्ष की अवधि बीत जाने के बाद जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को कड़ा कर दिया गया है। ऐसे मामलों में सीधे निकाय या ग्राम सभा स्तर से प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा।

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मजिस्ट्रेट स्तर से होगी जांच

दो वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र के लिए अब प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां आवेदन करना होगा। मजिस्ट्रेट स्तर से देरी के कारणों की जांच कराई जाएगी। कारण सही पाए जाने और प्रमाणित होने के बाद ही जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की कार्रवाई शुरू हो सकेगी।

 

 

इस बदलाव के चलते उन अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है, जिनके बच्चों की उम्र दो वर्ष से अधिक हो चुकी है और अब उन्हें स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए जन्म प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ रही है। ऐसे अभिभावक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसील और संबंधित कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

 

 

स्कूल में प्रवेश के लिए भी जरूरी

कई अभिभावकों के सामने बच्चों के स्कूल में प्रवेश का समय आने पर जन्म प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ रही है। लेकिन समय पर प्रमाण पत्र नहीं बन पाने के कारण अब उन्हें नई प्रक्रिया से गुजरना होगा। इससे दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की परेशानी और बढ़ सकती है।

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एसडीएम पिथौरागढ़ जितेंद्र वर्मा ने बताया कि दो वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र अब सीधे जारी नहीं होंगे। ऐसे मामलों में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट स्तर से जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की कार्रवाई होगी। फिलहाल निकाय या ग्राम सभा स्तर से ऐसे प्रमाण पत्र जारी करने पर रोक लगाई गई है।