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उत्तराखंड में गैस सिलेंडर संकट पर सरकार अलर्ट, USDMA ने 24 घंटे निगरानी के लिए आपातकालीन टीम तैनात की

देहरादून न्यूज़– उत्तराखंड में गैस सिलेंडर और खाद्य आपूर्ति की स्थिति पर नजर रखने के लिए राज्य स्तर पर आपातकालीन टीम तैनात कर दी गई है। Uttarakhand State Disaster Management Authority (USDMA) ने देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र में अधिकारियों और विशेषज्ञों की ड्यूटी लगाते हुए 24 घंटे निगरानी के निर्देश जारी किए हैं।

 

जारी आदेश के अनुसार वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य में ईंधन (गैस सिलेंडर) और खाद्य सामग्री की उपलब्धता की सतत निगरानी, सूचना संकलन और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों और अधिकारियों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है।

 

आदेश के मुताबिक 11 मार्च से 19 मार्च तक इंजीनियर, मौसम विशेषज्ञ, भूकंप विशेषज्ञ, आईटी और प्रबंधन से जुड़े कुल 26 अधिकारियों को रोस्टर के अनुसार तैनात किया गया है। ये अधिकारी राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र में मौजूद रहकर रोजाना स्थिति की निगरानी करेंगे और जरूरत पड़ने पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के साथ समन्वय स्थापित करेंगे।

 

अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संभावित आपूर्ति संकट या आपात स्थिति की जानकारी तुरंत संबंधित विभागों को दी जाए, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

 

अधिकारियों को दी गई 5 बड़ी जिम्मेदारियां

1- स्थिति की सतत निगरानी: राज्य में गैस सिलेंडर और खाद्य आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखना।
2- सूचना संकलन और विश्लेषण: आपूर्ति से जुड़ी सूचनाएं एकत्र कर उनका विश्लेषण करना।

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3- विभागों के बीच तालमेल: आवश्यकता अनुसार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग सहित अन्य विभागों के साथ समन्वय बनाना।

4- आपातकालीन संचालन केंद्र में उपस्थिति: रोस्टर के अनुसार 24 घंटे शिफ्ट में संचालन केंद्र में उपस्थित रहना।

5- स्थिति की रिपोर्टिंग: आपूर्ति से जुड़ी किसी भी गंभीर स्थिति की जानकारी तुरंत संबंधित विभागों तक पहुंचाना।

 

सीएम धामी ले रहे लगातार अपडेट
मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami राज्य में गैस सिलेंडर और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। वह तैनात अधिकारियों से नियमित रिपोर्ट ले रहे हैं और केंद्र सरकार से भी संपर्क में हैं, ताकि किसी भी स्थिति में आपूर्ति बाधित न हो।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है, जिससे आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो और आवश्यक सेवाएं सुचारु रूप से चलती रहें।

 

देहरादून और हल्द्वानी में होटल-रेस्टोरेंट पर संकट
व्यावसायिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने से Dehradun और Haldwani में होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और ठेला संचालकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। गैस की कमी के कारण कई प्रतिष्ठानों ने अपने मेन्यू से लगभग 70 प्रतिशत फूड आइटम हटा दिए हैं, जबकि कई संचालक वैकल्पिक इंतजाम में जुट गए हैं।

 

 

राजधानी देहरादून में हजारों होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और रेहड़ी संचालक व्यावसायिक गैस सिलेंडरों पर निर्भर हैं। आपूर्ति बाधित होने से इनके कारोबार के साथ-साथ हजारों लोगों के रोजगार पर भी असर पड़ रहा है। प्रशासन ने शिक्षण और स्वास्थ्य संस्थानों को गैस आपूर्ति के लिए जिला पूर्ति कार्यालय में आवेदन करने के निर्देश दिए हैं, जबकि अन्य प्रतिष्ठानों के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय को ईमेल के माध्यम से आवेदन करने की व्यवस्था की गई है।

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बड़े अस्पतालों ने भी किया गैस के लिए आवेदन
देहरादून के कई बड़े अस्पताल और शिक्षण संस्थान गैस आपूर्ति पर निर्भर हैं और उन्हें अति आवश्यक श्रेणी में रखा गया है। इसी क्रम में Graphic Era University, Max Hospital और Welham Girls School ने गैस आपूर्ति के लिए आवेदन किया है। जिला पूर्ति कार्यालय पुराने रिकॉर्ड के आधार पर उनकी जरूरत का आकलन कर गैस उपलब्ध कराने की प्रक्रिया कर रहा है।

 

जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने बताया कि गैस की कालाबाजारी रोकने और घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग पर कार्रवाई के लिए प्रवर्तन दल गठित किए गए हैं। जांच के दौरान मियांवाला, बालावाला, रांझावाला और रायपुर क्षेत्रों में 65 प्रतिष्ठानों की जांच की गई, जिनमें 37 घरेलू सिलेंडर व्यावसायिक उपयोग में पाए गए। सभी सिलेंडर जब्त कर गैस एजेंसी को सौंप दिए गए।

 

हल्द्वानी में लोग अपना रहे वैकल्पिक इंतजाम
हल्द्वानी में व्यावसायिक सिलेंडर की आपूर्ति बंद होने से होटल और रेस्टोरेंट संचालक परेशान हैं। कई प्रतिष्ठानों ने इंडक्शन चूल्हा, तंदूर, डीजल बर्नर और माइक्रोवेव जैसे विकल्प अपनाने शुरू कर दिए हैं। तेज आंच में बनने वाले मोमो और चाइनीज फूड जैसे कई व्यंजन मेन्यू से हटाने पड़े हैं।

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रेस्तरां संचालक गुरप्रीत सिंह ने बताया कि बिरयानी की बिक्री ज्यादा होती है, लेकिन गैस खत्म होने के कारण उन्हें तीन इंडक्शन चूल्हे और तंदूर मंगवाने पड़े। वहीं संचालक अभय नेगी का कहना है कि अब उन्हें लकड़ी और कोयले पर निर्भर होना पड़ रहा है।

 

ठेला और फड़ संचालकों पर सबसे ज्यादा असर
गैस सिलेंडर की कमी का सबसे ज्यादा असर ठेला और फड़ संचालकों पर पड़ा है। शहर में करीब 450 पंजीकृत ठेला संचालक हैं, जो खाने-पीने का सामान बेचकर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। सिलेंडर न मिलने से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
ठेला-फड़ वेंडर्स कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रमोद अग्निहोत्री ने प्रशासन से सस्ती दर पर लकड़ी और कोयला उपलब्ध कराने तथा जरूरत पड़ने पर आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

 

पेट्रोल-डीजल की बिक्री में बढ़ोतरी
इस संकट का असर ईंधन की बिक्री पर भी देखा जा रहा है। हल्द्वानी में पेट्रोल और डीजल की बिक्री में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पर्वतीय पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वीरेंद्र चड्डा के अनुसार शहर के करीब 80 पेट्रोल पंपों से रोजाना लगभग 10 लाख लीटर पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति की जा रही है और फिलहाल स्थिति सामान्य है। उन्होंने लोगों से घबराने की बजाय सामान्य तरीके से ईंधन खरीदने की अपील की है।