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मिडिल ईस्ट तनाव का असर: पेट्रोल-डीजल की कीमतों की हर पखवाड़े समीक्षा, ड्यूटी कटौती से 7,000 करोड़ का नुकसान

नई दिल्ली- पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों की हर पखवाड़े (15 दिन) में समीक्षा करने का फैसला किया है। यह कदम वैश्विक कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में आई तेज़ बढ़ोतरी के मद्देनज़र उठाया गया है।

 

सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने शुक्रवार को एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बताया कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है।

 

उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति बेहद गतिशील है और सरकार हर पखवाड़े बदलती परिस्थितियों के आधार पर फैसला लेगी। साथ ही ग्लोबल शिपिंग रूट्स और सप्लाई चेन में आई बाधाओं को भी गंभीर चुनौती बताया गया।

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💰 ड्यूटी कटौती से कितना नुकसान?
CBIC के मुताबिक पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कटौती से सरकार को अब तक लगभग 7,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है।

  • हाल के प्रस्तावों से दो हफ्तों में लगभग 1,500 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान
  • आयात और घरेलू खपत के ट्रेंड को ध्यान में रखकर आगे फैसले लिए जाएंगे

 

सरकार ने क्या कदम उठाए?

  • पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 21.90 रुपये से घटाकर 11.90 रुपये प्रति लीटर किया गया
  • वैश्विक कीमतों के दबाव से तेल कंपनियों को राहत देने की कोशिश
  • सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी
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🏭 किन कंपनियों को मिलेगा फायदा?
सरकार का यह कदम सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को राहत देने के लिए उठाया गया है, जिनमें शामिल हैं:

  • Indian Oil Corporation
  • Bharat Petroleum Corporation Limited
  • Hindustan Petroleum Corporation Limited

इन कंपनियों को बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के कारण होने वाले घाटे (अंडर-रिकवरी) से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

 

⚠️ उपभोक्ताओं को राहत नहीं
हालांकि, उत्पाद शुल्क में कटौती के बावजूद आम उपभोक्ताओं को फिलहाल कोई राहत नहीं मिलेगी।

  • पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें जस की तस रहेंगी
  • कटौती का लाभ तेल कंपनियों के घाटे को कम करने में जाएगा

 

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🌍 सप्लाई को लेकर सरकार का भरोसा

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है।

  • घरेलू LPG उत्पादन में करीब 40% की बढ़ोतरी
  • पहले कमर्शियल सप्लाई रोकी गई थी
  • अब धीरे-धीरे बढ़ाकर 70% तक बहाल कर दी गई

उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता दे रही है और सप्लाई में कोई बड़ी कमी नहीं आने दी जाएगी।

 

📌 क्यों अहम है यह फैसला?

  • मिडिल ईस्ट संकट का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर
  • कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी
  • सरकार का संतुलित कदम: राजस्व और सप्लाई दोनों पर ध्यान