8 साल से सऊदी अरब में फंसे उत्तरकाशी के इंद्रमणि नौटियाल, बेटी का छलका दर्द- “कोई भगवान बनकर पापा को घर वापस ला दे”

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की रहने वाली एक बेटी की भावुक अपील ने सोशल मीडिया पर लोगों को झकझोर दिया है। डुंडा विकासखंड के साड़ा (गोरसाड़) गांव निवासी दीपिका नौटियाल ने एक वीडियो जारी कर अपने पिता इंद्रमणि नौटियाल को सऊदी अरब से भारत वापस लाने की गुहार लगाई है। दीपिका का कहना है कि उनके पिता पिछले करीब आठ वर्षों से सऊदी अरब में फंसे हैं और परिवार आज भी उनकी घर वापसी का इंतजार कर रहा है।

वीडियो में भावुक होकर दीपिका कहती हैं, “8 साल हो गए… हमने अभी तक अपने पापा को नहीं देखा। मां हाउसवाइफ हैं, छोटा भाई है और मैं पढ़ाई कर रही हूं। हमारे घर की हालत बहुत खराब है। क्या पता आप लोगों में से कोई भगवान बन जाए और मेरे पापा को घर वापस ला दे।”

कंपनी ने पासपोर्ट रखा अपने कब्जे में
दीपिका के अनुसार, उनके पिता वर्ष 2018 में रोजगार के लिए सऊदी अरब गए थे। वहां एक निजी कंपनी में ट्रक चालक के रूप में कार्य करते समय उनके खड़े ट्रक से एक कार टकरा गई थी। इस मामले में उन्हें एक वर्ष की सजा हुई, जिसे उन्होंने पूरी कर ली। परिवार का आरोप है कि सजा पूरी होने के बाद भी कंपनी ने उनका पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में रख लिए और उन्हें भारत लौटने नहीं दिया।

बंधुआ मजदूर जैसी स्थिति, नहीं मिल रही नियमित सैलरी
परिवार का कहना है कि इंद्रमणि नौटियाल से बंधुआ मजदूर की तरह काम कराया जा रहा है। उन्हें नियमित वेतन भी नहीं मिल रहा, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। इंद्रमणि ही परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं और उनकी गैरमौजूदगी में परिवार बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहा है।
CM, PM, विदेश मंत्रालय और सांसद से लगाई गुहार
दीपिका ने बताया कि वह मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, विदेश मंत्रालय और सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास को कई बार पत्र भेज चुकी हैं। इसके अलावा वह सांसद अनिल बलूनी से भी व्यक्तिगत रूप से मिलकर मदद की अपील कर चुकी हैं, लेकिन अब तक उनके पिता की स्वदेश वापसी नहीं हो सकी।
डीएम को दोबारा सौंपा ज्ञापन
अपने पिता की वापसी की मांग को लेकर दीपिका दूसरी बार जिला कलेक्ट्रेट पहुंचीं और जिलाधिकारी प्रशांत आर्य को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पहले दिए गए प्रार्थना पत्र पर हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी और विदेश मंत्रालय व संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर जल्द से जल्द उनके पिता की भारत वापसी सुनिश्चित करने की मांग की।
मुआवजा बना सबसे बड़ी बाधा
परिजनों के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त कार का बीमा नहीं था, जिसके चलते अदालत ने भारी मुआवजा तय किया। परिवार का कहना है कि वाहन का बीमा कराना कंपनी की जिम्मेदारी थी, इसलिए पूरी जिम्मेदारी इंद्रमणि नौटियाल पर डालना उचित नहीं है। ग्रामीण गंगा प्रसाद और विनोद प्रसाद नौटियाल का भी कहना है कि यही मुआवजा उनकी स्वदेश वापसी में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।
सरकार से मानवीय आधार पर हस्तक्षेप की मांग
परिवार ने केंद्र और राज्य सरकार से मानवीय आधार पर हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि आठ वर्षों से पिता की वापसी का इंतजार कर रहा यह परिवार अब सरकार और प्रशासन की पहल पर ही उम्मीद लगाए बैठा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा दीपिका का भावुक वीडियो अब लोगों का ध्यान इस मामले की ओर खींच रहा है और हर कोई इंद्रमणि नौटियाल की जल्द सकुशल घर वापसी की कामना कर रहा है।








