जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल होने पर भाजयुमो मंडल अध्यक्ष पद से हटाई गईं मणिका राणा, बोलीं- “सत्य के लिए पद भी कुर्बान मंजूर”

जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन में शामिल होने के बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की नई टिहरी मंडल अध्यक्ष मणिका राणा को पद से हटा दिया गया है। संगठनात्मक कार्रवाई के बाद रविवार को मणिका राणा ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पहली निष्ठा सत्य और राष्ट्रहित के प्रति है तथा किसी भी संगठन से ऊपर सत्य का साथ देना उनके लिए सर्वोपरि है।
मणिका राणा ने अपने बयान में कहा कि वह जंतर-मंतर पर चल रहे विद्यार्थियों के आंदोलन में पूरी निष्ठा के साथ शामिल हुईं और उन परिवारों की आवाज बनने का प्रयास किया, जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन की प्रमुख मांगें पूरी होना लोकतंत्र की जीत है और सरकार ने देर से ही सही, लेकिन सही निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने सरकार की सराहना भी की।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सत्य के पक्ष में खड़े होने की वजह से उन्हें किसी पद या संगठनात्मक जिम्मेदारी से हाथ धोना पड़े, तो भी उन्हें इसका कोई पछतावा नहीं है। उनके अनुसार, सत्य और राष्ट्रहित के लिए संघर्ष करना किसी भी पद से अधिक महत्वपूर्ण है।
गौरतलब है कि 21 जुलाई को भाजयुमो टिहरी के जिलाध्यक्ष मनीष राणा ने मणिका राणा को पार्टी विरोधी गतिविधियों तथा संगठनात्मक कार्यों में उदासीनता का आरोप लगाते हुए नई टिहरी मंडल अध्यक्ष पद से हटा दिया था। उनके स्थान पर शुभम नेगी को नई टिहरी मंडल का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
संगठन की इस कार्रवाई के बाद मणिका राणा का यह पहला सार्वजनिक बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।








