उत्तराखण्डकुमाऊं,गढ़वाल,

पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 महंगा, अब बढ़ सकते हैं किराया और राशन के दाम

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने रविवार, 25 मई से पेट्रोल के दाम में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू कर दी है। नई कीमतों के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पहुंच गया है।

 

करीब 15 महीने बाद ईंधन की कीमतों में यह बड़ा बदलाव हुआ है। इससे पहले मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम ₹2 प्रति लीटर घटाए थे। अब कीमतें बढ़ने से आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।

 

 

महंगाई बढ़ने के संकेत
पेट्रोल-डीजल महंगा होने के बाद रोजमर्रा की कई चीजों के दाम बढ़ सकते हैं।

 

मालभाड़ा बढ़ेगा
ट्रक, टेम्पो और अन्य परिवहन साधनों का खर्च बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल, राशन और अन्य जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं।

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खेती की लागत बढ़ेगी
डीजल से चलने वाले ट्रैक्टर, पंपिंग सेट और कृषि उपकरणों पर किसानों का खर्च बढ़ेगा, जिससे अनाज और कृषि उत्पादों की लागत में भी इजाफा हो सकता है।

 

 

बस और ऑटो किराया बढ़ने की संभावना
सार्वजनिक परिवहन, स्कूल बसों और ऑटो-रिक्शा के किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

 

क्यों बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम?
तेल कंपनियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल इसकी मुख्य वजह है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बाद क्रूड ऑयल के दाम करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं।

 

 

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण सरकारी तेल कंपनियों पर लगातार दबाव बढ़ रहा था। घाटे की भरपाई के लिए कंपनियों ने आखिरकार कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा बना रहा तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम और बढ़ सकते हैं।

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कैसे तय होती है पेट्रोल-डीजल की कीमत?
देश में ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर तय होती हैं। तेल कंपनियां हर दिन सुबह 6 बजे नई कीमतें जारी करती हैं।

 

उपभोक्ताओं तक पहुंचते-पहुंचते पेट्रोल-डीजल की कीमत कई चरणों से गुजरती है—

1. कच्चे तेल की कीमत

भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में खरीदे गए क्रूड की कीमत के आधार पर बेस प्राइस तय होती है।

2. रिफाइनिंग और कंपनी चार्ज
कच्चे तेल को रिफाइनरियों में प्रोसेस कर पेट्रोल और डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मुनाफा जोड़ा जाता है।

 

3. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी
इसके बाद केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी और रोड सेस वसूलती है, जो पूरे देश में समान होती है।

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4. डीलर कमीशन
पेट्रोल पंप संचालकों का निश्चित कमीशन भी कीमत में शामिल होता है।

 

5. राज्य सरकार का VAT
अंत में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या सेल्स टैक्स लगाती हैं। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग होते हैं।

 

तेल कंपनियों को हो रहा था भारी नुकसान
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।

 

 

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के मुताबिक, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर तेल कंपनियों को हर महीने करीब ₹30 हजार करोड़ का घाटा हो रहा था। इसी दबाव के चलते कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया है।