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उत्तराखंड के 1385 इंटर कॉलेजों में 3670 प्रवक्ता पद खाली, नए सत्र से पहले भरने की उम्मीद कम

हाईकोर्ट में लंबित पदोन्नति मामला बना अड़चन, अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में 814 शिक्षक भेजे जाने से बढ़ सकती है दिक्कत

देहरादून न्यूज़- उत्तराखंड के राजकीय इंटर कॉलेजों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रवक्ताओं की भारी कमी बनी हुई है। प्रदेश के 1385 राजकीय इंटर कॉलेजों में कुल 3670 प्रवक्ता पद रिक्त हैं और एक अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से पहले इन पदों के भरने की संभावना भी कम दिखाई दे रही है। इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

 

दरअसल, एलटी संवर्ग से प्रवक्ता पद पर पदोन्नति का मामला उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल में लंबित है। इसी कारण पदोन्नति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। दूसरी ओर इस वर्ष प्रवक्ता पदों पर नई भर्ती को लेकर भी अभी तक कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है। ऐसे में कई राजकीय इंटर कॉलेजों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी बनी रह सकती है।

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शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों में पहले से ही शिक्षकों की कमी रही है। खासकर दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों के दुर्गम विद्यालयों में यह समस्या और अधिक गंभीर है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों की पढ़ाई पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

 

 

मैदानी जिलों में अपेक्षाकृत कम रिक्त पद
प्रदेश के कई शिक्षक सुगम क्षेत्रों में रहने की प्रवृत्ति के कारण लंबे समय से देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल जैसे मैदानी जिलों में सेवाएं दे रहे हैं। इसी वजह से इन जिलों के इंटर कॉलेजों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के शिक्षकों के पद अपेक्षाकृत कम खाली हैं। वहीं दूसरी ओर उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, चंपावत और चमोली जैसे दूरस्थ पर्वतीय जिलों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है।

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814 शिक्षक अप्रैल में अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में जाएंगे
उत्तराखंड बोर्ड से संबद्ध राजकीय इंटर कॉलेजों के 814 एलटी और प्रवक्ता शिक्षकों को अप्रैल में उनके वर्तमान विद्यालयों से कार्यमुक्त किया जाएगा। ये शिक्षक केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध 186 अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करेंगे। इससे पहले से ही शिक्षक संकट झेल रहे दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों में समस्या और बढ़ने की आशंका है।

 

अतिथि शिक्षकों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं
रिक्त पदों की पूर्ति के लिए प्रदेश में अक्सर अतिथि शिक्षकों की अस्थायी नियुक्ति की जाती रही है। हाल ही में 1346 एलटी शिक्षकों की नियुक्ति के बाद 205 अतिथि शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।

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हालांकि पहले यह आश्वासन दिया गया था कि स्थायी नियुक्ति होने पर अतिथि शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा। इस मुद्दे को लेकर अतिथि शिक्षकों में नाराजगी भी देखी जा रही है।

 

सरकार ने जल्द समाधान का दिया भरोसा
प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए गंभीर है। उन्होंने बताया कि पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के साथ ही नई भर्ती प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी, ताकि विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।