उत्तराखण्डकुमाऊं,

हल्द्वानी स्टेडियम में हंगामा: भुगतान विवाद के चलते विदेशी क्रिकेटरों समेत खिलाड़ी आधे घंटे तक बसों में फंसे

हल्द्वानी न्यूज– गौलापार स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में सोमवार को लीजेंड्स लीग क्रिकेट के दौरान बड़ा विवाद सामने आया। मैच खत्म होने के बाद श्रीलंका, साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और भारत के कई दिग्गज खिलाड़ी स्टेडियम परिसर में ही फंस गए। बताया जा रहा है कि भुगतान न मिलने से नाराज बाउंसरों ने मुख्य गेट पर ताला लगा दिया, जिससे खिलाड़ी करीब आधे घंटे तक बाहर नहीं निकल सके।

 

सोमवार 16 मार्च को लीजेंड्स लीग क्रिकेट के तहत सदर्न सुपर स्टार्स और इंडिया कैप्टन्स के बीच मुकाबला खेला गया था। मैच समाप्त होने के बाद खिलाड़ी और टीम स्टाफ होटल लौटने के लिए बसों में बैठ चुके थे। इसी दौरान सुरक्षा में तैनात बाउंसरों ने विरोध जताते हुए स्टेडियम के मुख्य गेट को बंद कर दिया।

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गेट बंद होने के कारण खिलाड़ियों की बसें स्टेडियम परिसर के अंदर ही रुक गईं। इस दौरान दक्षिण अफ्रीका के हाशिम अमला, जिम्बाब्वे के हैमिल्टन मसाकाद्ज़ा और श्रीलंका के दिलशान मुनावीरा सहित कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बसों में ही फंसे रहे। भारतीय खिलाड़ियों में गौरव तोमर, शेल्डन जैक्सन, अजीत चंदिला, रजत भाटिया, परविंदर अवाना और पुनीत बिष्ट भी इस दौरान मौजूद थे।

 

अचानक बने इस हालात से स्टेडियम परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। खिलाड़ी बसों में इंतजार करते रहे, जबकि आयोजन से जुड़े अधिकारी स्थिति को संभालने में जुट गए। करीब आधे घंटे बाद आयोजकों और सुरक्षा एजेंसी के बीच बातचीत हुई। भुगतान का आश्वासन मिलने के बाद बाउंसरों ने गेट खोल दिया और खिलाड़ियों की बसें होटल के लिए रवाना हो सकीं।

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सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही एजेंसी के सुपरवाइजर कुलदीप सिंह ने बताया कि आयोजन में 82 बाउंसर और 42 सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए थे, जिनका तीन दिन का भुगतान लंबित था। कई बार भुगतान की मांग के बावजूद समाधान न निकलने पर कर्मचारियों ने विरोध का रास्ता अपनाया।

 

वहीं, खेल विभाग की उपनिदेशक राशिका सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि यह आयोजन एक निजी एजेंसी द्वारा कराया जा रहा है और विभाग की भूमिका केवल स्टेडियम उपलब्ध कराने तक सीमित है। उन्होंने बताया कि आगे के मैचों के लिए निर्धारित तिथि तक भुगतान जमा होने के बाद ही अनुमति दी जाएगी।

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लीजेंड्स लीग क्रिकेट के को-फाउंडर रमन रहेजा ने घटना को “कम्युनिकेशन गैप” बताया। उनके अनुसार सुरक्षा एजेंसी का प्रभारी उस समय शहर से बाहर था, जिससे भुगतान को लेकर समन्वय नहीं हो पाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही कर्मचारियों का भुगतान कर दिया जाएगा, ताकि आगे ऐसे हालात न हो।