उत्तराखण्डकुमाऊं,गढ़वाल,

केंद्रीय बजट 2026-27 से उत्तराखंड को बड़ी उम्मीदें: कनेक्टिविटी, टैक्स राहत और पर्वतीय विकास पर टिकी नजर

नई दिल्ली/देहरादून– रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन दिल्ली में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी। इस बजट को लेकर उत्तराखंड में खासा उत्साह है। वजह साफ है—2027 में राज्य में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और उससे पहले केंद्र व राज्य सरकार विकास की रफ्तार को और तेज करना चाहती हैं। फिलहाल उत्तराखंड में केंद्र सरकार के सहयोग से करीब 3.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं चल रही हैं, जिनका सीधा असर सड़क, रेल, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं पर पड़ रहा है।

 

 

राज्य सरकार को उम्मीद है कि बजट में चारधाम और सीमांत क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए बड़े ऐलान होंगे। इसके साथ ही बागेश्वर–कर्णप्रयाग और रामनगर–कर्णप्रयाग रेल लाइनों के सर्वे को आगे बढ़ाने तथा चल रही मेगा परियोजनाओं के लिए पर्याप्त केंद्रीय सहयोग मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। आगामी कुंभ आयोजन के लिए स्पेशल पैकेज की मांग भी केंद्र के सामने रखी गई है।

 

आम लोगों की भी टिकी नजर
बजट से सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि आम उत्तराखंडी भी बड़ी राहत की उम्मीद कर रहा है।
नौकरीपेशा वर्ग टैक्स में छूट चाहता है, व्यापारी GST को सरल बनाने की मांग कर रहे हैं, जबकि निवेशकों की नजर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स पर टिकी है।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी- शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर काठगोदाम पुलिस का शिकंजा: 08 चालक गिरफ्तार, 08 वाहन सीज

 

बुनियादी सुविधाओं और टैक्स राहत की मांग
बैंकर्स एम्प्लॉई यूनियन के महामंत्री जगमोहन मेंदिरत्ता का कहना है कि सड़कों के निर्माण के बावजूद ग्रामीण और शहरी इलाकों में आज भी पानी, सीवर और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई क्षेत्रों में दशकों पुरानी सीवर लाइनें आज भी सड़कों पर बहती नजर आती हैं। उन्होंने सड़क, बिजली, पानी और सीवर के लिए विशेष बजट प्रावधान की मांग की।
साथ ही, सर्विस क्लास के लिए टैक्स छूट को महंगाई के अनुरूप बढ़ाने की जरूरत बताई।

 

GST नियमों में राहत की मांग
दून वैली व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष जसपाल छाबड़ा और दून उद्योग व्यापार मंडल के महासचिव सुनील मैसॉन ने कहा कि उत्तराखंड में कंपोजिशन स्कीम और GST रजिस्ट्रेशन की सीमा अन्य राज्यों से कम है, जिससे छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
उन्होंने मांग की कि कंपोजिशन स्कीम और GST रजिस्ट्रेशन की न्यूनतम सीमा बढ़ाई जाए। साथ ही GST में पंजीकृत व्यापारियों के लिए बीमा जैसी सुरक्षा व्यवस्था का भी बजट में प्रावधान हो।

 

LTCG टैक्स में बदलाव की उम्मीद
हल्द्वानी के एडवोकेट हिमांशु कोठारी के अनुसार, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोग लंबे समय से LTCG टैक्स में राहत की मांग कर रहे हैं। यदि लंबी अवधि के निवेश को टैक्स में प्रोत्साहन मिलता है तो इससे बाजार में स्थिरता आएगी और आम निवेशक लॉन्ग टर्म निवेश की ओर बढ़ेंगे।

यह भी पढ़ें 👉  SSP नैनीताल प्रहलाद मीणा की सख्ती: हल्द्वानी में संचालित CSC सेंटरों पर छापेमारी, 8 सेंटर तत्काल बंद

 

मध्यम वर्ग को राहत की दरकार
हल्द्वानी के पार्षद मनोज जोशी का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच मध्यम वर्ग पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में टैक्स-फ्री इनकम की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि आम लोगों को वास्तविक राहत मिल सके।

 

प्री-बजट में उत्तराखंड की प्रमुख मांगें
10 जनवरी को दिल्ली में हुई प्री-बजट बैठक में उत्तराखंड सरकार ने पर्वतीय विकास, रिवर्स पलायन और क्लाइमेट रेजिलिएंस को लेकर विशेष केंद्रीय सहयोग की मांग की थी।
सरकार ने उत्तराखंड को देश का “वॉटर टावर” बताते हुए इको-सिस्टम सेवाओं और पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष वित्तीय प्रोत्साहन की जरूरत जताई।
इसके अलावा, विशेष श्रेणी राज्य होने के कारण आपदा से हुई क्षति की पूरी भरपाई SDRF से करने की मांग भी रखी गई।

 

रेलवे नेटवर्क और कनेक्टिविटी पर जोर
प्री-बजट बैठक में ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल लाइन को समय पर पूरा करने, बागेश्वर–कर्णप्रयाग और रामनगर–कर्णप्रयाग रेल सर्वे को मंजूरी देने की मांग की गई। सरकार का मानना है कि इससे बद्रीनाथ–केदारनाथ जैसे तीर्थ स्थलों तक पहुंच आसान होगी और सड़क मार्ग पर दबाव कम होगा।

यह भी पढ़ें 👉  बिंदुखत्ता में युवती से छेड़छाड़ का आरोप, कार्रवाई की मांग को लेकर कोतवाली में प्रदर्शन

 

सामाजिक और कृषि से जुड़ी मांगें
राज्य सरकार ने जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए क्लस्टर आधारित तारबंदी, 60–79 वर्ष आयु वर्ग के बुजुर्गों की पेंशन में केंद्रांश बढ़ाने, आंगनवाड़ी कर्मियों के मानदेय में वृद्धि और जल जीवन मिशन की अवधि बढ़ाने की मांग भी रखी।

 

केंद्र से चल रहे 4 बड़े प्रोजेक्ट
1- ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना: करीब 52 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह परियोजना चारधाम और गढ़वाल की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।

2- चारधाम ऑल-वेदर रोड प्रोजेक्ट: हर मौसम में सुरक्षित सड़क संपर्क से पर्यटन और आपात सेवाओं को मजबूती।

3- सोंग बांध और जमरानी बांध परियोजनाएं: पेयजल और बिजली संकट से राहत की उम्मीद।

4- केदारनाथ–बद्रीनाथ पुनर्विकास परियोजना: 145 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा।

 

अब देखना यह है कि केंद्रीय बजट 2026-27 उत्तराखंड की इन उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।