उत्तराखण्डकुमाऊं,

उत्तराखंड- कम उम्र में चुनी गई ग्राम प्रधान पर हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार को कार्रवाई के निर्देश

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने ऊधमसिंह नगर जिले के बाजपुर विकासखंड स्थित ग्राम हलालपुर की ग्राम प्रधान की योग्यता को लेकर दायर जनहित याचिका पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार को कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मामला ग्राम प्रधान की आयु निर्धारित सीमा से कम होने से जुड़ा है।

 

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार के पास यह अधिकार है कि यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि निर्धारित योग्यताओं को पूरा नहीं करता है तो उसे पद से हटाया जा सकता है।
यह जनहित याचिका याचिकाकर्ता अंकित राणा की ओर से दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि ग्राम प्रधान का चुनाव के समय उम्र 21 वर्ष से कम थी, जबकि उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम के तहत ग्राम प्रधान पद के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित है।

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याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, 2016 की धारा 138(1) के अनुसार यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि अयोग्य पाया जाता है तो उसे पद से हटाया जाना चाहिए।

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मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने याचिका को लंबित रखने के बजाय निस्तारित कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राज्य सरकार के समक्ष अपना प्रत्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी है।

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साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि यदि इस मामले में कोई प्रत्यावेदन प्राप्त होता है तो संबंधित ग्राम प्रधान को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देते हुए कानून के अनुसार शीघ्र निर्णय लिया जाए।