उत्तराखण्डकुमाऊं,गढ़वाल,

उत्तराखंड- कक्षा 1 में दाखिले की उम्र पर यू-टर्न, 300 स्कूलों में 4000 बच्चों का एडमिशन संकट में

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत जहां अकादमिक क्षेत्र में एकरूपता की बात करते हुए “एक प्रवेश–एक परीक्षा” व्यवस्था लागू कर चुके हैं, वहीं शिक्षा विभाग के स्तर पर पहली कक्षा में प्रवेश की आयु को लेकर हुए अचानक बदलाव ने नई उलझन खड़ी कर दी है। नया सत्र शुरू होने के करीब आठ दिन बाद आयु गणना की तिथि बदलने से सरकारी और निजी स्कूलों में अलग-अलग नियम बन गए हैं, जिससे अभिभावक और स्कूल संचालक असमंजस में हैं।

 

अचानक हुए इस बदलाव का असर खासतौर पर कुमाऊं के एजुकेशन हब हल्द्वानी में देखने को मिल रहा है। यहां 300 से अधिक निजी विद्यालयों में कक्षा एक में पढ़ रहे करीब 4000 बच्चों के दाखिले पर संकट मंडराने की आशंका जताई जा रही है। अधिकांश स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है, ऐसे में अब आयु सीमा बदलने से स्थिति और जटिल हो गई है।

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30 जून तक छह वर्ष की दी गई थी छूट
समग्र शिक्षा उत्तराखंड ने आरटीई प्रवेश को लेकर आदेश जारी करते हुए 30 जून तक छह वर्ष की आयु पूरी करने वाले बच्चों को कक्षा एक में प्रवेश देने की अनुमति दी थी। नर्सरी से संचालित स्कूलों में संबंधित तिथि तक तीन वर्ष पूरे करने वाले बच्चों के दाखिले का प्रावधान किया गया था, जबकि कक्षा एक से संचालित स्कूलों में 30 जून तक छह वर्ष पूरे करने वाले छात्रों के प्रवेश के निर्देश दिए गए थे।

 

इसी आधार पर 28 फरवरी 2026 को मुख्य शिक्षा अधिकारी जीआर जायसवाल ने जिला स्तर पर पत्र जारी किया और स्कूलों ने सामान्य प्रवेश प्रक्रिया भी पूरी कर ली। पिछले वर्ष भी पहले एक अप्रैल तक छह वर्ष की आयु का नियम लागू किया गया था, जिसे बाद में संशोधित किया गया था।

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आरटीई पंजीकरण भी हो चुके
निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश के लिए 24 मार्च से अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक पंजीकरण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सरकारी आदेश में 30 जून की तिथि स्पष्ट होने के कारण अभिभावकों ने उसी आधार पर आवेदन किए और पोर्टल सेटिंग भी उसी हिसाब से की गई। अब आयु सीमा में नई स्पष्टता आने से आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में भी दिक्कत आने की संभावना है।

 

पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश भगत ने कहा कि पहले 30 जून तक छह वर्ष पूरे करने वाले बच्चों को प्रवेश देने का आदेश जारी किया गया और स्कूलों ने उसी आधार पर एडमिशन कर दिए। अब इन बच्चों का भविष्य अधर में है। सरकारी और निजी स्कूलों के लिए एक ही नियम होना चाहिए।

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वहीं प्रभारी निदेशक माध्यमिक शिक्षा कंचन देवराड़ी का कहना है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्पष्ट प्रावधान है कि कक्षा एक में प्रवेश के लिए बच्चे की आयु छह वर्ष होनी चाहिए और इसके लिए एक अप्रैल की तिथि तय है। सरकारी स्कूलों में कुछ बच्चों की आयु संबंधी समस्या को देखते हुए 30 जून तक छूट दी गई है, लेकिन निजी स्कूलों में एक अप्रैल की तिथि ही मान्य रहेगी।

 

आयु सीमा को लेकर शिक्षा विभाग की इस दोहरी नीति ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है और सैकड़ों बच्चों के दाखिले पर अनिश्चितता की स्थिति बन गई।