गणतंत्र दिवस परेड में नहीं दिखेगी उत्तराखंड की झांकी, रोस्टर सिस्टम बना वजह; भारत पर्व में होगा ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ का प्रदर्शन

नई दिल्ली स्थित कर्तव्यपथ पर 26 जनवरी को आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में इस वर्ष उत्तराखंड की झांकी शामिल नहीं होगी। राज्य सूचना विभाग (डीआईपीआर) के संयुक्त निदेशक के.एस. चौहान ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्रालय द्वारा झांकियों के चयन में अब रोस्टर प्रणाली लागू की गई है, ताकि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को समान अवसर मिल सके। इसी व्यवस्था के तहत इस बार उत्तराखंड को परेड में स्थान नहीं मिल पाया।
हालांकि, राज्यवासियों के लिए राहत की बात यह है कि 26 से 31 जनवरी तक लाल किला परिसर में आयोजित होने वाले भारत पर्व में उत्तराखंड की झांकी प्रदर्शित की जाएगी। तय कार्यक्रम के अनुसार 26 जनवरी को उत्तराखंड की झांकी लाल किले पर पहुंचेगी और निर्धारित क्रम में आमजन के लिए प्रदर्शित होगी। इसके माध्यम से देश-विदेश से आने वाले दर्शक देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान से रूबरू हो सकेंगे।
भारत पर्व में दिखेगा ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’
इस वर्ष उत्तराखंड की प्रस्तावित झांकी का विषय ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ रखा गया है। झांकी में कुमाऊं क्षेत्र के अल्मोड़ा जिले के पारंपरिक तांबा उद्योग को केंद्र में रखते हुए राज्य की लोक कला, कारीगरी और आत्मनिर्भरता की भावना को दर्शाया जाएगा।कर्तव्यपथ पर अवसर न मिलने के बावजूद भारत पर्व के मंच से उत्तराखंड अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन करेगा।
झांकियों में उत्तराखंड का शानदार रिकॉर्ड
उत्तराखंड की झांकियां पूर्व में राष्ट्रीय स्तर पर सराही जाती रही हैं।
- वर्ष 2023 में मानसखंड झांकी ने पहला स्थान हासिल किया।
- 2021 में केदारखंड झांकी को तीसरा स्थान मिला।
- 2025 में सांस्कृतिक विरासत एवं साहसिक खेल विषय पर आधारित झांकी तीसरे स्थान पर रही।
इसी मजबूत रिकॉर्ड के चलते इस बार भी गणतंत्र दिवस परेड में झांकी के शामिल होने की उम्मीद थी, लेकिन रोस्टर व्यवस्था के कारण राज्य को मौका नहीं मिल सका।
रोस्टर सिस्टम क्यों लागू हुआ
हर वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में अधिकतम 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियों को शामिल किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों को लगातार अवसर न मिलने की शिकायतें सामने आई थीं। इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए रक्षा मंत्रालय ने रोस्टर सिस्टम लागू किया है, जिसके तहत इस वर्ष उत्तराखंड कर्तव्यपथ की परेड से बाहर रहा।
अब तक 16 बार कर्तव्यपथ पर दिखी उत्तराखंड की झांकी
उत्तराखंड की झांकी अब तक 16 बार गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बन चुकी है। प्रमुख वर्षों और विषय इस प्रकार रहे—
- 2025: सांस्कृतिक विरासत और साहसिक खेल
- 2024: विकसित उत्तराखंड
- 2023/2022: मानसखंड
- 2021: प्रगति की ओर बढ़ता उत्तराखंड/केदारखंड
- 2019: अनासक्ति आश्रम
- 2018: ग्रामीण पर्यटन
- 2016–2015: रम्माण
- 2014: केदारनाथ
- 2010: जड़ी-बूटी / कुंभ मेला
- 2009–2007: साहसिक पर्यटन
- 2006: कॉर्बेट नेशनल पार्क
- 2005: फूलों की घाटी
- 2003: नंदा राजजात यात्रा / फुलदेई
कर्तव्यपथ पर इस वर्ष भले ही उत्तराखंड की झांकी न दिखे, लेकिन भारत पर्व के मंच से राज्य की संस्कृति, परंपरा और आत्मनिर्भरता का संदेश देश-दुनिया तक जरूर पहुंचेगा।








