उत्तराखण्डकुमाऊं,

बनभूलपुरा PMAY पुनर्वास में बड़ा फर्जीवाड़ा: बाहर के किराएदारों समेत सैकड़ों आवेदन रद्द होने की कगार पर

हल्द्वानी न्यूज़- बनभूलपुरा में अतिक्रमण हटाने के बाद शुरू हुई पुनर्वास प्रक्रिया में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत खुद को बेघर बताकर आवेदन करने वालों में कई ऐसे लोग मिले हैं, जिनके दिल्ली और उत्तर प्रदेश में पहले से पक्के मकान हैं। प्रशासन द्वारा किए जा रहे डोर-टू-डोर सत्यापन में यह खुलासा हुआ है, जिससे सैकड़ों आवेदन खारिज होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

 

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 21 मार्च से 1 अप्रैल तक लगाए गए विशेष शिविरों में करीब 7 हजार आवेदन प्राप्त हुए थे। अब नगर निगम की टीमें फील्ड में जाकर हर आवेदन की बारीकी से जांच कर रही हैं। जांच के दौरान फॉर्म में दी गई जानकारी और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर सामने आ रहा है।

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सत्यापन में यह भी पाया गया है कि कई बाहरी राज्यों के लोग, जो बनभूलपुरा में किराए पर रह रहे थे, उन्होंने खुद को स्थायी निवासी दिखाकर योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर दिया। ऐसे मामलों को अब चिन्हित कर निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

 

 

6 टीमें कर रहीं जांच, मानकों पर हो रही सख्त पड़ताल
नगर निगम प्रशासन के अनुसार, कुल 6 टीमें क्षेत्र में सक्रिय हैं, जो सभी आवेदनों का सत्यापन कर रही हैं। जांच पूरी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना के तय मानकों के अनुसार की जा रही है। इसमें यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आवेदक के पास देश में कहीं भी पक्का मकान न हो, वह 1 सितंबर 2024 से पहले से नगर निगम क्षेत्र में निवास कर रहा हो और उसकी आय निर्धारित सीमा (EWS/LIG/MIG श्रेणी) के भीतर हो।

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सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी अंतिम सूची
नगर आयुक्त पारितोष वर्मा ने बताया कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र और अपात्र लाभार्थियों की सूची सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी। फील्ड रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन की कमेटी अंतिम निर्णय लेगी। गलत जानकारी देने वाले आवेदनों को सीधे खारिज किया जाएगा।

 

बड़ी संख्या में आवेदन निरस्त होने की संभावना
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, आय, संपत्ति और निवास संबंधी मानकों पर खरे न उतरने वाले सैकड़ों आवेदनों को निरस्त किया जा सकता है। इससे योजना का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक ही सीमित रखने की कोशिश की जा रही है।

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अतिक्रमणकारियों को जमीन पर रहने का अधिकार नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में स्पष्ट किया है कि वहां रह रहे लोगों को जमीन पर बने रहने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने प्रभावित परिवारों की पहचान कर PMAY के तहत आवेदन के लिए शिविर लगाने के निर्देश दिए थे। साथ ही पात्र परिवारों को छह महीने तक 2,000 रुपये मासिक सहायता देने और अगली सुनवाई तक बेदखली पर रोक के आदेश भी दिए गए हैं।

 

अब सभी की नजरें प्रशासन की अंतिम सूची और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि किसे पुनर्वास का लाभ मिलेगा और कौन इससे बाहर होगा।