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देहरादून- जन्म-मृत्यु पंजीकरण पर बड़ा अपडेट, नए नियम अभी नहीं लागू, अधिसूचना तक पुरानी व्यवस्था रहेगी जारी

देहरादून न्यूज़- जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण को लेकर चल रहे असमंजस के बीच उत्तराखंड में फिलहाल पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी। केंद्र सरकार की ओर से जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम में किए गए संशोधन प्रदेश में तभी प्रभावी होंगे, जब उनकी अधिसूचना जारी हो जाएगी। तब तक एक वर्ष से अधिक विलंब से आने वाले जन्म-मृत्यु पंजीकरण के मामलों की स्वीकृति उपजिलाधिकारी (एसडीएम) स्तर से ही होती रहेगी।

 

 

नए नियम अधिसूचना के बाद होंगे लागू

केंद्र सरकार ने हाल ही में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम में संशोधन किया है। संशोधित व्यवस्था के तहत एक से दो वर्ष तक विलंबित पंजीकरण के मामलों को एसडीएम स्तर से स्वीकृति देने का प्रावधान किया गया है। वहीं, दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में पंजीकरण कराने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होगी।

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हालांकि, प्रदेश में इन संशोधित प्रावधानों को अभी लागू नहीं किया गया है। निदेशक नागरिक पंजीकरण ईवा आशीष श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया है कि नए संशोधन अधिसूचना जारी होने के बाद ही उत्तराखंड में प्रभावी होंगे।

 

 

अभी एक वर्ष से अधिक विलंब पर एसडीएम की मंजूरी

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार जन्म एवं मृत्यु के पंजीकरण में एक वर्ष से अधिक का विलंब होने पर संबंधित मामले की स्वीकृति एसडीएम स्तर से की जाती है। अधिसूचना जारी होने तक यही व्यवस्था जारी रहेगी।

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संशोधन लागू होने के बाद एक से दो वर्ष तक विलंबित मामलों की स्वीकृति एसडीएम कर सकेंगे। इससे अधिक पुराने मामलों के लिए प्रक्रिया बदल जाएगी।

 

 

दो साल से पुराने मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी

नए नियम लागू होने के बाद यदि जन्म या मृत्यु के पंजीकरण में दो वर्ष से अधिक की देरी हो चुकी है, तो संबंधित व्यक्ति को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करना होगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति मिलने के बाद ही ऐसे मामलों में पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

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निदेशक नागरिक पंजीकरण ईवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि संशोधित व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट है। प्रदेश में अधिसूचना जारी होने तक पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी और एक वर्ष से अधिक विलंबित पंजीकरण के मामलों में एसडीएम स्तर से ही स्वीकृति दी जाएगी।