हरिद्वार में 14 करोड़ की जीएसटी चोरी का खुलासा, राज्य कर विभाग की छापेमारी में 12 करोड़ जमा

देहरादून न्यूज़- उत्तराखंड राज्य कर विभाग की केंद्रीयकृत आसूचना इकाई (सीआईयू) ने हरिद्वार स्थित एक इलेक्ट्रिकल गुड्स निर्माता इकाई से जुड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 14 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का खुलासा किया है। जांच के दौरान संबंधित फर्मों ने 12 करोड़ रुपये की जीएसटी राशि मौके पर ही जमा करा दी।
राज्य कर आयुक्त प्रतिक जैन के निर्देश पर चार जून को सीआईयू की टीम ने संबंधित व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर व्यापक जांच अभियान चलाया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार डेटा विश्लेषण, जीएसटी रिटर्न, ई-वे बिल और खुफिया सूचनाओं के आधार पर यह संदेह उत्पन्न हुआ था कि फर्म के कारोबार में लगातार वृद्धि होने के बावजूद उसके अनुपात में कर जमा नहीं किया जा रहा है।
जांच के दौरान अधिकारियों ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की पूरी चेन, माल की वास्तविक आवाजाही, वाहनों की ढुलाई क्षमता तथा एएनपीआर कैमरों से प्राप्त वाहन मूवमेंट संबंधी आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि फर्म द्वारा कुछ संस्थाओं से माल की वास्तविक प्राप्ति किए बिना ही इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया जा रहा था, जिससे कर देयता को कृत्रिम रूप से कम किया जा रहा था।
अधिकारियों ने संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ, बयान दर्ज करने और डिजिटल उपकरणों की जांच के बाद पाया कि कर चोरी के लिए बोगस बिलों का इस्तेमाल किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में पिछले दो वित्तीय वर्षों के दौरान लगभग 14 करोड़ रुपये की कर चोरी का मामला सामने आया है।
रातभर चली इस कार्रवाई के दौरान टीम ने फर्म के विभिन्न व्यापारिक स्थलों से महत्वपूर्ण दस्तावेज और अभिलेख अपने कब्जे में लिए। इसके साथ ही डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच के लिए विशेषज्ञों की सहायता भी ली गई है।
विभाग का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण अभी जारी है तथा जांच का दायरा बढ़ाते हुए अन्य संबंधित संस्थाओं को भी शामिल किया जा सकता है। राज्य कर विभाग के अनुसार कार्रवाई के दौरान ही संबंधित फर्मों द्वारा 12 करोड़ रुपये की जीएसटी राशि जमा करा दी गई।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि फर्जी बिलिंग और अवैध आईटीसी के माध्यम से कर चोरी करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
इस कार्रवाई में उपायुक्त विनय पांडे, योगेश मिश्रा, निखिलेश श्रीवास्तव, अजय बिरथरे और अर्जुन राणा, सहायक आयुक्त केके पांडे, योगेश रावत, अविनाश झा, गार्गी बहुगुणा और अभिषेक ठाकुर सहित राज्य कर अधिकारी दुर्गेश पुरोहित, शैलेन्द्र चमोली, गजेंद्र भंडारी, रजत कुमार, शहाना परवीन और हेमा नेगी शामिल रहे।








