पिथौरागढ़: दादी के सामने 10 साल के बच्चे को उठा ले गया गुलदार, 200 मीटर दूर मिला शव; मां एक घंटे तक सीने से लगाए बिलखती रही

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र में गुलदार के हमले में 10 वर्षीय मासूम की दर्दनाक मौत हो गई। बच्चा घर के आंगन में अपनी दादी के सामने खेल रहा था, तभी घात लगाकर बैठे गुलदार ने उस पर हमला कर दिया। गुलदार बच्चे को जबड़े में दबाकर जंगल की ओर ले गया। दादी के शोर मचाने पर परिजन और ग्रामीण उसकी तलाश में दौड़े, लेकिन घर से करीब 200 मीटर दूर बच्चे का शव बरामद हुआ। मासूम की मौत से परिवार में कोहराम मच गया, वहीं घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
घटना शनिवार शाम करीब पांच बजे गंगोलीहाट तहसील मुख्यालय से लगभग आठ किलोमीटर दूर भंडारीगांव और खेतीगांव के बीच की बताई जा रही है। मृतक की पहचान 10 वर्षीय प्रियांशु के रूप में हुई है।
दादी के सामने बच्चे को उठा ले गया गुलदार
जानकारी के अनुसार, प्रियांशु शनिवार शाम अपने घर के आंगन में दादी के सामने खेल रहा था। इसी दौरान अचानक गुलदार ने उस पर हमला कर दिया और उसका गला दबाकर जबड़े में जकड़ लिया। इससे पहले कि दादी कुछ समझ पातीं, गुलदार बच्चे को लेकर जंगल की ओर भाग गया।
दादी की चीख-पुकार सुनकर बच्चे की मां और आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। इसके बाद सभी ने जंगल की ओर दौड़कर बच्चे की तलाश शुरू की।
200 मीटर दूर झाड़ियों में मिला मासूम का शव
ग्रामीणों की खोजबीन के दौरान घर से करीब 200 मीटर दूर झाड़ियों में प्रियांशु का शव पड़ा मिला। मासूम को मृत देखकर उसकी मां और दादी बेसुध हो गईं। मां ने बच्चे के शव को गोद में उठाकर सीने से लगा लिया और करीब एक घंटे तक उसे नहीं छोड़ा। वह बिलखते हुए अपने बच्चे को वापस लौटाने की गुहार लगाती रही। मां का यह हृदयविदारक दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। बाद में दादी ने किसी तरह मां को संभाला, जिसके बाद बच्चे के शव को घर लाया गया।
शिकायत के बावजूद गुलदार के आतंक से निजात नहीं मिलने का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार, भंडारीगांव और खेतीगांव क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार की सक्रियता बनी हुई थी। ग्रामीणों का कहना है कि 25 सितंबर को ग्राम प्रधान दान सिंह मेहता ने जनता दरबार में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र में गुलदार के आतंक से निजात दिलाने और सुरक्षा के प्रभावी इंतजाम करने की मांग की थी।
अब बच्चे की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद गुलदार को पकड़ने के लिए समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।
सूचना पर पहुंची पुलिस और वन विभाग की टीम
घटना की सूचना मिलते ही वन दरोगा देवेंद्र सिंह महरा के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम में अजय पल्याल, मनीषा, लक्ष्मी लुंठी और दीवान सिंह शामिल रहे। वहीं, गंगोलीहाट पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस टीम ने मौके पर सुरक्षा व्यवस्था संभालते हुए आवश्यक कार्रवाई की।
पुलिस और वन विभाग की टीम ने बच्चे के शव को कब्जे में लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), गंगोलीहाट पहुंचाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रविवार को शव का पोस्टमॉर्टम कराया जाना निर्धारित था।
ग्रामीणों ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
मासूम की मौत के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। उन्होंने क्षेत्र में सक्रिय गुलदार को जल्द पकड़ने और जरूरत के अनुसार पिंजरा लगाने, पीड़ित परिवार को नियमानुसार उचित मुआवजा देने तथा गांव में सुरक्षा के ठोस इंतजाम करने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, बच्चे के पिता मजदूरी और राजमिस्त्री का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। ऐसे में परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
गंगोलीहाट क्षेत्र में पहले भी हो चुके हैं गुलदार के हमले
गंगोलीहाट और आसपास के क्षेत्रों में गुलदार के हमले में बच्चों की जान जाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। वर्ष 2018 में पोखरी गांव में दिल्ली से आए पांच वर्षीय कार्तिक को गुलदार उठा ले गया था। वर्ष 2019 में सौली गांव में आंगन में खेल रहे पांच साल के बच्चे की तेंदुए के हमले में मौत हो गई थी। वर्ष 2023 में भी गंगोलीहाट क्षेत्र में दिनदहाड़े गुलदार के हमले में एक बच्चे की जान चली गई थी।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। अब ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से मांग की है कि गुलदार के आतंक से निजात दिलाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।








