उत्तराखण्डकुमाऊं,

उत्तराखंड- यहाँ RTE दाखिलों में गड़बड़ी के आरोप, ग्राम प्रधान समेत कई मामलों ने खड़े किए सवाल

रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू की गई आरटीई (शिक्षा का अधिकार) योजना अब सवालों के घेरे में आ गई है। रुद्रपुर के एक प्रमुख निजी स्कूल में आरटीई कोटे के तहत प्रवेश प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं के मामले सामने आने से शिक्षा विभाग में भी हलचल मच गई है।

 

जानकारी के अनुसार, कुछ प्रभावशाली लोग नियमों को दरकिनार कर योजना का लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। ताजा मामले में एक ग्राम प्रधान पर अपने बच्चे का दाखिला आरटीई कोटे में कराने के लिए खुद को आर्थिक रूप से कमजोर दर्शाने का आरोप लगा है।

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बताया जा रहा है कि दाखिले के लिए प्रस्तुत आय प्रमाण पत्र में उनकी वार्षिक आय केवल 70 हजार रुपये दिखाई गई है, जबकि स्थानीय स्तर पर उनकी वास्तविक आर्थिक स्थिति इससे कहीं अधिक मजबूत बताई जा रही है। प्रारंभिक दस्तावेज जांच के दौरान मामला संदेह के घेरे में आया, हालांकि अभी तक औपचारिक जांच पूरी नहीं हुई है।

 

इसी तरह एक अन्य मामले में फर्जी पते के जरिए आरटीई का लाभ लेने की कोशिश सामने आई है। आरोप है कि एक परिवार मूल रूप से प्रीत विहार क्षेत्र में रहता है, लेकिन आवेदन के समय स्कूल के नजदीक किराए का पता दर्शाया गया। जबकि उसी परिवार के अन्य बच्चों को रोजाना प्रीत विहार से ही स्कूल लाया और ले जाया जाता है। इससे वास्तविक निवास को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

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खंड शिक्षा अधिकारी सावेद आलम ने कहा कि यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो संबंधित आवेदनों को निरस्त किया जाएगा और नियमों के तहत कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।

 

आय और निवास सत्यापन प्रणाली पर उठे सवाल
आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में आय प्रमाण पत्र और निवास सत्यापन की मौजूदा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वर्तमान में अधिकतर मामलों में स्थानीय स्तर पर जारी दस्तावेजों पर ही भरोसा किया जाता है, जिससे गलत जानकारी देकर लाभ लेने की संभावना बनी रहती है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आय प्रमाण पत्रों को आयकर विभाग या अन्य डिजिटल डेटाबेस से जोड़ा जाए तो फर्जीवाड़े पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। वहीं, निवास सत्यापन के लिए आधार आधारित एड्रेस वेरिफिकेशन और जियो-टैगिंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की मांग भी उठने लगी है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि आरटीई जैसी योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचे, इसके लिए पारदर्शी और सख्त जांच व्यवस्था बेहद जरूरी है।