एलपीजी संकट के बीच उत्तराखंड सरकार की नई SOP, पर्यटन व्यवसायों को मिलेगी प्राथमिकता
रेस्टोरेंट-ढाबों को 37% गैस आवंटन, राज्य में रोज 2650 व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति तय

देहरादून न्यूज़– एलपीजी संकट के बीच उत्तराखंड सरकार ने पर्यटन और इससे जुड़े व्यवसायों को राहत देने के लिए व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है। खाद्य-नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा जारी इस SOP के तहत विभिन्न पर्यटन और औद्योगिक श्रेणियों को उनकी आवश्यकता का 20 प्रतिशत तक व्यावसायिक एलपीजी उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार ने राज्य में प्रतिदिन कुल 2650 व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता निर्धारित की है। इसी आधार पर विभिन्न क्षेत्रों के लिए गैस का प्रतिशत तय किया गया है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा 37 प्रतिशत रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों को दिया जाएगा। अन्य व्यावसायिक संस्थानों के लिए भी अलग-अलग प्रतिशत निर्धारित किए गए हैं।
पर्यटन सीजन को देखते हुए लिया गया फैसला
सचिव आनंद स्वरूप की ओर से जारी SOP में कहा गया है कि चारधाम यात्रा और पर्यटन गतिविधियों के चलते होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायों में गैस की मांग तेजी से बढ़ जाती है। कई बार आपूर्ति बाधित होने से पर्यटन उद्योग प्रभावित होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के निर्देशों के तहत यह व्यवस्था लागू की गई है।

तेल कंपनियां बाजार हिस्सेदारी के अनुसार करेंगी सप्लाई
राज्य की तीनों प्रमुख तेल एवं गैस कंपनियां—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—अपनी वर्तमान बाजार हिस्सेदारी के अनुसार गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी। सिलेंडरों का वितरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा और यह व्यवस्था अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।
जिलों के लिए तय हुआ वितरण कोटा
सरकार ने गैस वितरण को जिलों में मौजूद कनेक्शनों की संख्या के आधार पर विभाजित किया है। इसके तहत देहरादून को 31%, हरिद्वार और नैनीताल को 13-13%, ऊधम सिंह नगर को 9%, चमोली को 6%, रुद्रप्रयाग को 5%, जबकि टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी और अल्मोड़ा को 4-4% गैस आवंटित की गई है। इसके अलावा पिथौरागढ़ को 3% तथा बागेश्वर और चंपावत को 2-2% गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
पर्यटन व्यवसाय को राहत की उम्मीद
नई SOP से राज्य के होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इससे पर्यटन सीजन के दौरान गैस की कमी से होने वाली दिक्कतों को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।








