उत्तराखण्डकुमाऊं,

बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की मांग पर हाईकोर्ट में याचिका निस्तारित

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल जिले के बिन्दुखत्ता क्षेत्र को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया है। यह याचिका चोरगलिया निवासी सामाजिक कार्यकर्ता भुवन पोखरिया द्वारा दायर की गई थी।

 

याचिका में कहा गया था कि बिन्दुखत्ता क्षेत्र में करीब एक लाख की आबादी निवास करती है, इसके बावजूद इसे अब तक राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिल पाया है। याचिकाकर्ता ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य के दो मुख्यमंत्रियों द्वारा बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की घोषणा की जा चुकी है, लेकिन 2 दिसंबर 2025 को की गई घोषणा को बाद में विलोपित कर दिया गया।

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याचिका में यह भी बताया गया कि उत्तराखंड में लगभग पांच लाख लोग वन क्षेत्रों और खत्तों में निवास कर रहे हैं। हरिद्वार जिले के चार गांवों और रामनगर क्षेत्र के सुंदरखाल को राजस्व गांव का दर्जा दिया जा चुका है। ऐसे में बिन्दुखत्ता को भी वनाधिकार कानून 2006 के तहत हल्द्वानी के दमुवाढूंगा की तर्ज पर राजस्व गांव घोषित किया जाना चाहिए।

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मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को निस्तारित कर दिया। हालांकि, अदालत के इस फैसले के बाद बिन्दुखत्ता के लोगों की लंबे समय से चली आ रही राजस्व गांव की मांग पर अब आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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