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Petrol-Diesel Crisis Update: युद्ध के बीच भारत में नहीं होगी पेट्रोल-डीजल की कमी, सरकार ने बताया कितने दिन का है तेल और LPG स्टॉक

दुनियाभर में जारी युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल के बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। ईरान-इजरायल संघर्ष, लाल सागर में बढ़ते खतरे और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट के कारण दुनियाभर में तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे माहौल में भारत में भी लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की किल्लत हो सकती है?

 

इन तमाम आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने देशवासियों को बड़ी राहत दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने साफ कहा है कि भारत के पास पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है और फिलहाल पेट्रोल, डीजल या LPG की सप्लाई को लेकर किसी तरह की कोई चिंता नहीं है।

 

देश के पास कितने दिन का तेल और गैस स्टॉक?
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मजबूत ऊर्जा बैकअप तैयार कर रखा है। मौजूदा समय में देश के पास लगभग 69 दिनों का क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) और करीब इतने ही दिनों की नेचुरल गैस का भंडार सुरक्षित है। वहीं घरेलू रसोई गैस यानी LPG का करीब 45 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है।

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रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता में हुई मंत्रियों के समूह (IGoM) की उच्च स्तरीय बैठक में भी यह स्पष्ट किया गया कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह मजबूत है और किसी भी प्रकार की ईंधन कमी की संभावना नहीं है।

 

बढ़ाया गया LPG उत्पादन
सरकार ने एहतियात के तौर पर घरेलू गैस उत्पादन में भी बड़ा इजाफा किया है। पहले जहां प्रतिदिन 35 से 36 हजार टन LPG का उत्पादन होता था, वहीं अब इसे बढ़ाकर लगभग 54 हजार टन प्रतिदिन कर दिया गया है। इसका उद्देश्य संभावित वैश्विक संकट के बीच देश में रसोई गैस की निर्बाध सप्लाई बनाए रखना है।

 

तेल कंपनियों पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव
हालांकि देश में ईंधन की उपलब्धता पर्याप्त है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी से तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। ईरान-इजरायल तनाव और लाल सागर मार्ग में बाधाओं के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है।

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भारत में पिछले करीब 70 दिनों से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक तेल कंपनियों को रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यदि हालात लंबे समय तक बने रहे तो 2026 की पहली तिमाही तक कुल घाटा 2 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता है। ऐसे में आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

 

पीएम मोदी ने की तेल बचाने की अपील
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की है। उन्होंने लोगों से मेट्रो, सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग का अधिक इस्तेमाल करने को कहा है ताकि तेल की खपत कम की जा सके।

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सरकार का मानना है कि यदि वैश्विक संकट लंबा चलता है तो ईंधन बचत देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाएगी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल की खपत में छोटी सी कमी भी देश के लिए बड़ा आर्थिक सहारा बन सकती है।

 

 

भारत ने सुरक्षित निकाले अपने तेल टैंकर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री खतरों के बीच भारत ने अपने सभी 14 तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। सरकार का कहना है कि देश की समुद्री सुरक्षा और सप्लाई चेन पूरी तरह सुरक्षित है तथा जरूरत पड़ने पर हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

 

सरकार का साफ संदेश है कि फिलहाल देश में पेट्रोल, डीजल और LPG की कोई कमी नहीं है और आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।